“मराठी मेरी मां, हिंदी मेरी मौसी, मां मर जाए तो चलता है, मौसी नहीं”: शिवसेना विधायक प्रकाश सुर्वे का विवादित बयान

Marathi is my mother, Hindi my aunt. It's fine if the mother dies, but not the aunt': Shiv Sena MLA Prakash Surve's Controversial Remark
Marathi is my mother, Hindi my aunt. It's fine if the mother dies, but not the aunt': Shiv Sena MLA Prakash Surve's Controversial Remark

Marathi vs Hindi Dispute: महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक प्रकाश सुर्वे ने मराठी और हिंदी को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिसने पूरे राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा — “मराठी मेरी मां है और हिंदी मेरी मौसी। मां मर जाए तो चलता है, लेकिन मौसी नहीं मरनी चाहिए, क्योंकि मौसी ज्यादा प्यार करती है।”

यह बयान उन्होंने उत्तर भारतीय समुदाय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दिया। कार्यक्रम के मंच से बोलते हुए प्रकाश सुर्वे ने कहा, “मां से ज्यादा प्यार आपने मुझे दिया है, यह प्यार मेरे साथियों को भी दीजिए।” इस बयान के साथ ही उन्होंने मराठी कहावत का हिंदी में अनुवाद करते हुए मराठी और हिंदी के रिश्ते पर अपनी राय रखी। लेकिन, उनके इस तर्क को लेकर अब राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है।

राज्य के विपक्षी दलों ने सुर्वे के बयान को मराठी अस्मिता पर हमला बताया है। विपक्ष ने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र की मिट्टी में जन्मे एक विधायक को ऐसी आपत्तिजनक तुलना करने की क्या ज़रूरत थी? वहीं, कुछ नेताओं का कहना है कि सुर्वे ने चुनावी लाभ के लिए उत्तर भारतीय मतदाताओं को खुश करने की कोशिश की है।

जानकारी के अनुसार, प्रकाश सुर्वे एकनाथ शिंदे गुट के विधायक हैं और मुंबई उपनगर के मागाठाणे विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। इन दिनों राज्य में महानगरपालिका चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं, ऐसे में मराठी और हिंदी भाषाई मुद्दा फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि सुर्वे का यह बयान पालिका चुनाव से पहले क्षेत्रीय मतदाताओं को साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। महाराष्ट्र में अक्सर मराठी बनाम हिंदी का मुद्दा चुनावी वक्त में उभरता रहा है।

हालांकि, इस बयान के बाद खुद शिंदे गुट भी असहज नजर आ रहा है। पार्टी के कुछ नेताओं ने कहा कि प्रकाश सुर्वे का बयान “गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया” है और उनका उद्देश्य किसी भाषा या समुदाय को ठेस पहुँचाना नहीं था।

फिलहाल, महाराष्ट्र में प्रकाश सुर्वे का यह बयान राजनीतिक बवाल का कारण बन चुका है। एक ओर मराठी संगठन इस बयान की निंदा कर रहे हैं, वहीं उत्तर भारतीय समुदाय इसे “सम्मान की बात” बता रहा है।

अब देखना यह होगा कि क्या यह बयान सिर्फ चुनावी शोर में दब जाएगा या फिर आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की सियासत में एक नया भाषाई मोड़ लेगा।

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