लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

विपक्ष ने स्पीकर पर सदन में पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। नोटिस में कहा गया है कि राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़ा मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी गई।

Lok Sabha Speaker Om Birla Faces No-Confidence Notice; Procedure Explained
Lok Sabha Speaker Om Birla Faces No-Confidence Notice; Procedure Explained

नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर अब औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्पीकर ने लोकसभा सचिवालय को नोटिस की वैधता की जांच करने और नियमों के तहत प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने नियम 94(सी) के तहत यह नोटिस सौंपा है।

विपक्ष ने स्पीकर पर सदन में पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। नोटिस में कहा गया है कि राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़ा मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके अलावा, सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन और विपक्षी नेताओं को बोलने से रोके जाने को भी आधार बनाया गया है। विपक्ष का आरोप है कि सत्तापक्ष को खुली छूट दी जाती है, जबकि विपक्षी सांसदों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, नोटिस पर 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर हैं। इनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक समेत कई दलों के सांसद शामिल हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश, मोहम्मद जावेद और अन्य नेताओं ने यह नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा।

संसदीय नियमों के मुताबिक, नोटिस की जांच के बाद कम से कम 14 दिनों के अंतराल पर इसे सदन में चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। प्रस्ताव को पारित होने के लिए लोकसभा की कुल सदस्यता का बहुमत आवश्यक होगा। मौजूदा संख्या बल को देखते हुए विपक्ष के लिए इसे पारित कराना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

अविश्वास प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि पार्टी ने जो निर्णय लिया है, वे उसके समर्थन में हैं। वहीं भाजपा सांसद रवि किशन ने इसे विपक्ष का ‘ड्रामा’ बताते हुए कहा कि विपक्ष को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की लगातार चुनावी सफलताओं से परेशानी है।

लोकसभा सचिवालय ने नोटिस प्राप्त होने की पुष्टि की है और कहा है कि नियमों के अनुसार इस पर विचार किया जाएगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की कार्यवाही और राजनीतिक माहौल को और गर्मा सकता है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 Breaking News Wale - Latest Hindi News by Breaking News Wale