शराब नीति मामला: बरी होने के बाद घर पहुंचे अरविंद केजरीवाल, पत्नी सुनीता और बेटी से लिपटकर हुए भावुक

Liquor Policy Case: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए आज का दिन कानूनी जीत के साथ-साथ पारिवारिक भावुकता का भी रहा। शराब नीति से जुड़े सीबीआई मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट से पूरी तरह बरी होने के बाद जब वे अपने आवास पहुंचे, तो वहां एक अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला।

Liquor Policy Case: Kejriwal Gets Emotional as He Reaches Home, Embraces Wife Sunita and Daughter
Liquor Policy Case: Kejriwal Gets Emotional as He Reaches Home, Embraces Wife Sunita and Daughter

Liquor Policy Case: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए आज का दिन कानूनी जीत के साथ-साथ पारिवारिक भावुकता का भी रहा। शराब नीति से जुड़े सीबीआई मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट से पूरी तरह बरी होने के बाद जब वे अपने आवास पहुंचे, तो वहां एक अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला। जैसे ही केजरीवाल घर के मुख्य दरवाजे पर पहुंचे, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल ने दौड़कर उन्हें गले लगा लिया। महीनों के मानसिक तनाव और कानूनी लड़ाई के बाद मिली इस राहत ने पूरे परिवार की आंखों को नम कर दिया।

घर पर स्वागत के दौरान केजरीवाल की बेटी ने भी आगे बढ़कर अपने पिता को कसकर गले लगाया और उनका हाल पूछा। इस खास मौके पर पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी उनके साथ मौजूद थे, जिन्हें भी आज कोर्ट ने सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। घर के बाहर बड़ी संख्या में जुटे समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और नारेबाजी के साथ जश्न मनाया, लेकिन घर के भीतर का माहौल पूरी तरह से व्यक्तिगत और भावनात्मक था। सुनीता केजरीवाल काफी देर तक मुस्कुराते हुए अपने पति को निहारती रहीं, जो उनके लंबे संघर्ष के सुखद अंत की गवाही दे रहा था।

इससे पहले, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और विजय नायर समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में सीबीआई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि जांच एजेंसी कोई भी विश्वसनीय सबूत पेश करने में नाकाम रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी जांच प्रक्रिया में न तो कोई आपराधिक षड्यंत्र नजर आया और न ही कोई ऐसा ‘क्रिमिनल इंटेंट’ मिला जिससे भ्रष्टाचार की पुष्टि हो सके।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सीबीआई का आरोपपत्र कई कमियों से भरा था और इसमें गवाहों के बयानों का कोई ठोस आधार नहीं था। जज ने कहा कि बिना किसी ठोस सामग्री के अरविंद केजरीवाल जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को आरोपित करना गलत था। इस फैसले ने न केवल केजरीवाल और उनकी टीम को बड़ी कानूनी राहत दी है, बल्कि इसे आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक संजीवनी के रूप में भी देखा जा रहा है।

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