भारत के कानूनी जगत में आज एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक होगा। दो दशक से अधिक का लंबा अनुभव रखने वाले जस्टिस सूर्यकांत हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं और अपने करियर के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक और दूरगामी फैसले लिखे हैं।
उनके ऐतिहासिक फैसलों की झलक
जस्टिस सूर्यकांत ने जिन महत्वपूर्ण फैसलों में अपना योगदान दिया है, उनमें शामिल हैं:
- अनुच्छेद-370: जम्मू-कश्मीर से संबंधित।
- अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र से जुड़े मामले।
- भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाले निर्णय।
- पर्यावरण संरक्षण संबंधी फैसले।
- लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाले निर्णय।
- सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उन्होंने लगभग 80 फैसले लिखे हैं।
- उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खोलने वाला फैसला दिया।
- नागरिकता अधिनियम की धारा-6ए को चुनौती देने वाली याचिका और दिल्ली की आबकारी नीति मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देने जैसे मामले भी इनमें शामिल हैं।
- वह ‘पेगासस स्पाइवेयर’ से जुड़े मामले की सुनवाई करने वाली पीठ का हिस्सा थे, जिसने अवैध निगरानी के आरोपों की जांच के लिए विशेषज्ञों का पैनल गठित किया था।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जज रहने के दौरान, उन्होंने जेल में बंद कैदियों को वैवाहिक मुलाकात या कृत्रिम गर्भाधान के जरिए संतान पैदा करने का अधिकार देने संबंधी फैसला भी सुनाया था, जो एक मानवीय और प्रगतिशील निर्णय था।
LIVE: Swearing-in-Ceremony of the Chief Justice of India Shri Justice Surya Kant at Rashtrapati Bhavan https://t.co/EZGbzgCbig
— President of India (@rashtrapatibhvn) November 24, 2025
शपथ ग्रहण समारोह में वैश्विक उपस्थिति
जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में कई देशों के मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायिक अधिकारी शामिल हुए, जो भारत की न्यायिक प्रणाली के प्रति वैश्विक सम्मान को दर्शाता है। उपस्थित गणमान्यों में भूटान के मुख्य न्यायाधीश ल्योंपो नॉर्बू शेरिंग, ब्राजील के मुख्य न्यायाधीश एडसन फाचिन, केन्या की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मार्था कूम, तथा मलेशिया, मॉरीशस, नेपाल, और श्रीलंका के भी मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जज शामिल थे।
गांव की पाठशाला से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेटवार गांव में एक शिक्षक परिवार में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन शहरी चकाचौंध से दूर, एक सरल ग्रामीण परिवेश में बीता।
उनकी आठवीं तक की पढ़ाई गांव के ही एक स्कूल में हुई, जहाँ बैठने के लिए बेंच तक नहीं थीं। उन्होंने पहली बार किसी शहर को तब देखा जब वह 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने के लिए हांसी कस्बे में गए।
उन्होंने 1981 में हिसार के गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से ग्रेजुएशन और 1984 में रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की।
1984 में हिसार की जिला अदालत से वकालत शुरू करने के बाद, वह 1985 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने के लिए चंडीगढ़ आ गए और जुलाई 2000 में हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने।
जनवरी 2004 में उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का स्थायी जज बनाया गया, जिसके बाद वह अक्टूबर 2018 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और फिर 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए।
जस्टिस सूर्यकांत के साथ काम कर चुके लोग उन्हें एक गंभीर, समझदार और संतुलित विचारों वाला न्यायविद मानते हैं, जिन्होंने अपने करियर में हमेशा सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा, पीड़ितों के अधिकार, और संवैधानिक संतुलन जैसे मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखाई है।
