इजरायल-ईरान जंग: ओवैसी ने उठाए प्रधानमंत्री के दौरे पर सवाल, कहा- ‘क्या नेतन्याहू ने भारत को धोखा दिया?’

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए कथित प्रिवेंटिव मिसाइल हमले को लेकर केंद्र सरकार से कई तीखे सवाल पूछे।

हैदराबाद: इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए प्रिवेंटिव मिसाइल हमले के बाद एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओवैसी ने इस हमले के समय और भारत की रणनीतिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल ने प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का इस्तेमाल अपने सैन्य अभियानों को छिपाने और दुनिया को गलत संदेश देने के लिए किया है।

‘क्या नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री को जानकारी दी थी?’

ओवैसी ने प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे और उसके तुरंत बाद हुए हमले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को इस हमले की पूर्व सूचना दी थी? उन्होंने कहा, “अगर नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री को बताया था कि वे ईरान पर हमला करने वाले हैं, तो प्रधानमंत्री को अपना दौरा तुरंत खत्म कर स्वदेश लौट आना चाहिए था। और यदि इजरायल ने भारत को अंधेरे में रखकर यह हमला किया, तो यह भारत के साथ सीधा धोखा है।” ओवैसी ने सुरक्षा प्रोटोकॉल पर चिंता जताते हुए पूछा कि यदि प्रधानमंत्री का विमान हवा में होता और उस समय ऐसा हमला होता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?

तटस्थता की विरासत पर खतरा

ओवैसी ने भारत की दशकों पुरानी विदेश नीति का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 80 वर्षों से भारत खाड़ी देशों के मामलों में तटस्थ रहा है। उन्होंने भाजपा सरकार से पूछा कि इस विरासत का क्या हुआ? ओवैसी के अनुसार, इस हमले से दुनिया में यह संदेश गया है कि भारत पूरी तरह से इजरायल के साथ खड़ा है और ईरान के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिकों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ओवैसी ने अंदेशा जताया कि यदि यह युद्ध फैला तो बहरीन, कतर और सऊदी अरब जैसे देश भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओवैसी ने युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि ईरान में मौजूद 50,000 और इजरायल में रह रहे 10,000 भारतीय नागरिकों को तुरंत सुरक्षित वापस लाने के इंतजाम किए जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल ने भारत की प्रतिष्ठा का इस्तेमाल गाजा में किए गए नरसंहार से ध्यान भटकाने के लिए किया है, जिससे भारत को कुछ हासिल नहीं होने वाला।

ओवैसी के इन सवालों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच घरेलू राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि विदेश मंत्रालय या भाजपा नेतृत्व इन गंभीर आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है।

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