भारतीय तटरक्षक बल ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में एक समन्वित ऑपरेशन चलाकर तेल तस्करी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। 5 और 6 फरवरी को समुद्र और हवाई संसाधनों की मदद से की गई इस कार्रवाई में तीन संदिग्ध जहाजों को जब्त किया गया था। यह पूरा ऑपरेशन मुंबई से करीब 100 नॉटिकल मील पश्चिम में अंजाम दिया गया। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद अब ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि जब्त किए गए इन जहाजों का ईरान से कोई संबंध नहीं है।
तटरक्षक अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से सस्ता तेल लाकर समुद्र के बीचों-बीच एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर (शिप-टू-शिप ट्रांसफर) करता था। इस खेल के पीछे का मुख्य मकसद कस्टम ड्यूटी और समुद्री कड़े नियमों से बचना था। भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर जब तकनीकी निगरानी सिस्टम ने जहाजों के इस जमावड़े और असामान्य गतिविधियों को पकड़ा, तो तुरंत तटरक्षक जहाजों और विमानों को तैनात कर दिया गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था और इसके संचालक कई देशों में फैले हुए हैं। अपनी पहचान छिपाने के लिए ये जहाज बार-बार अपने नाम, झंडे और डिजिटल पहचान बदलते रहते थे ताकि कार्गो के असली सोर्स का पता न चल सके। पकड़े गए जहाजों से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक डेटा, दस्तावेजों और चालक दल से पूछताछ के आधार पर अब इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। शुरुआती जांच के संकेत बता रहे हैं कि इन जहाजों का स्वामित्व विदेशी संस्थाओं से जुड़ा हो सकता है, जिससे यह मामला और भी पेचीदा हो गया है।
