भारत-चीन व्यापार में बड़ा मोड़: चीनी कंपनियों के लिए फिर खुलेंगे सरकारी ठेकों के दरवाजे, 2020 की पाबंदियां हटने के आसार

Indo-China Trade: भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच नई दिल्ली से एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों पर पिछले पांच साल से लगे कड़े प्रतिबंधों को हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

India May Re-Open Govt Tenders to Chinese Firms After 6-Year Hiatus
India May Re-Open Govt Tenders to Chinese Firms After 6-Year Hiatus

Indo-China Trade: भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच नई दिल्ली से एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों पर पिछले पांच साल से लगे कड़े प्रतिबंधों को हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह कदम 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच उपजे गतिरोध को खत्म करने और व्यापारिक संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

मौजूदा नियमों के तहत चीनी कंपनियों को भारत में सरकारी ठेकों के लिए पंजीकरण कराना और राजनीतिक व सुरक्षा संबंधी मंजूरी लेना अनिवार्य था, जिसकी वजह से वे लगभग 700 से 750 अरब डॉलर के बड़े बाजार से बाहर हो गई थीं। अब वित्त मंत्रालय इन अनिवार्यताओं को खत्म करने की योजना बना रहा है, हालांकि इस पर अंतिम मुहर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा लगाई जानी बाकी है।

इस खबर के आते ही भारतीय बाजार में खलबली मच गई और बीएचईएल जैसी बड़ी मशीनरी कंपनियों के शेयरों में 10 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों को चीनी कंपनियों से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा का डर सताने लगा है।

सरकार के भीतर से ही कई विभागों ने इन प्रतिबंधों को हटाने का अनुरोध किया है क्योंकि इनके कारण कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और बिजली क्षेत्र की योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली समिति ने भी इस ढील की सिफारिश की है ताकि भारत की तापीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के लक्ष्य को समय पर पूरा किया जा सके। बिजली क्षेत्र में चीनी उपकरणों की अनुपलब्धता भारत के विकास लक्ष्यों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई थी।

इस नीतिगत बदलाव के पीछे वैश्विक समीकरण भी एक बड़ी वजह माने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ और अमेरिका-पाकिस्तान के बीच सुधरते संबंधों ने भारत को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं पर फिर से विचार करने को मजबूर किया है।

पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा के बाद से ही दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें शुरू करने और वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे कदम उठाए गए हैं। हालांकि, भारत अभी भी पूरी तरह से बेफिक्र नहीं है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामलों में चीन को लेकर अपनी सतर्कता बरकरार रखे हुए है।

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