India-EU trade deal: भारत–EU की ऐतिहासिक ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ आज होगी फाइनल—ट्रंप सरकार पर पड़ेगा बड़ा असर?

India-EU trade deal: भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर चल रही लंबी बातचीत अंततः सफल हो गई है। लगभग चार साल और 18 राउंड की मीटिंग्स के बाद अब इस समझौते का रास्ता साफ हो गया है और इसका आधिकारिक ऐलान आज होने वाला है।

India and EU to Finalize ‘Mother of All Deals’ Today
India and EU to Finalize ‘Mother of All Deals’ Today

India-EU trade deal: भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर चल रही लंबी बातचीत अंततः सफल हो गई है। लगभग चार साल और 18 राउंड की मीटिंग्स के बाद अब इस समझौते का रास्ता साफ हो गया है और इसका आधिकारिक ऐलान आज होने वाला है। इस डील को भारत के लिए एक बड़ा व्यापारिक मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारतीय निर्यात कई यूरोपीय देशों में कम टैक्स या बिना टैक्स के पहुंच सकेंगे। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने पुष्टि की है कि समझौता फाइनल हो चुका है और जरूरी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद इसे अगले साल की शुरुआत में लागू कर दिया जाएगा।

इस समझौते से भारतीय टेक्सटाइल्स, लेदर और फुटवियर, जेम्स और जूलरी, केमिकल्स और समुद्री उत्पाद जैसे कई सेक्टर्स को फायदा होगा। अभी तक यूरोपियन यूनियन में इन उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी काफी ऊंची है, जैसे समुद्री उत्पादों पर 26% और लेदर गुड्स पर 17% तक का शुल्क लगता है। भारत से जाने वाले माल पर औसत टैरिफ 3.8% है, लेकिन कुछ श्रेणियों में यह बहुत ज्यादा है। वहीं दूसरी तरफ EU से भारत आने वाले उत्पादों पर औसतन 9.3% ड्यूटी लगती है, जिसमें कारों पर 35.5%, प्लास्टिक पर 10.4% और दवाओं पर करीब 9.9% शुल्क लगता है। उम्मीद है कि FTA लागू होने के बाद दोनों तरफ की कई श्रेणियों में ड्यूटी में कटौती होगी, जिससे व्यापार की मात्रा में बढ़ोतरी होगी।

समझौते के दौरान यूरोपियन यूनियन की तरफ से सबसे बड़ा मुद्दा पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम रहे, जिन्हें भारत के लिए पूरी तरह मानना आसान नहीं था। EU चाहता था कि भारत उसकी कारों के आयात पर लगने वाले भारी टैक्स में राहत दे। वहीं भारत ने कृषि और डेयरी सेक्टर को लेकर अपनी चिंताएँ रखीं। भारत का तर्क था कि इन क्षेत्रों पर विदेशी आयात का दबाव बढ़ा तो घरेलू किसानों और डेयरी उद्योग को नुकसान हो सकता है। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा। सूत्रों के मुताबिक, किसी एक सेक्टर में यदि किसी पक्ष को ज्यादा राहत मिली तो दूसरे पक्ष को किसी और सेक्टर में बराबर की भरपाई की गई है।

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और EU के बीच द्विपक्षीय व्यापार 136.53 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। इसमें भारत का निर्यात हिस्सा 75.85 बिलियन डॉलर का रहा, जो इस बात का संकेत है कि यूरोप भारत के लिए पहले से ही एक प्रमुख और तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। इस नए समझौते के बाद भारत को इस बाजार में और मजबूत उपस्थिति हासिल हो सकती है।

इस FTA की सबसे खास बात इसका पैमाना है। इस समझौते के दायरे में कुल मिलाकर लगभग 1.9 अरब लोगों का बाजार शामिल है। कई व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता चीन और आसियान देशों के बीच हुए FTA से भी बड़ा है। चीन–आसियान FTA में आसियान एक सिंगल कस्टम यूनिट की तरह काम नहीं करता, जबकि यूरोपियन यूनियन एक सिंगल कस्टम्स यूनिट है, जिसके कारण भारत–EU FTA को दुनिया का सबसे बड़ा द्विपक्षीय व्यापार समझौता माना जा रहा है।

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