नई दिल्ली: दिल्ली से वाराणसी के बीच हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा के साथ ही उत्तर प्रदेश में रेल यातायात की तस्वीर बदलने की उम्मीदें तेज हो गई हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद लखनऊ से दिल्ली की दूरी महज दो घंटे में और लखनऊ से वाराणसी की दूरी करीब एक घंटे में तय की जा सकेगी। वहीं यात्री दिल्ली से वाराणसी का सफर केवल तीन घंटे में पूरा कर सकेंगे। इस कॉरिडोर पर बुलेट ट्रेनों की रफ्तार 300 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने की संभावना है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की इस घोषणा से उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे के अधिकारी खासे उत्साहित हैं। अधिकारियों का कहना है कि देश में हाईस्पीड ट्रेनों के संचालन को लेकर पहले से ही काम चल रहा है। मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबा हाईस्पीड रेल कॉरिडोर निर्माणाधीन है, जिस पर बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी। ऐसे में बजट में नए हाईस्पीड कॉरिडोर की घोषणा को रेलवे नेटवर्क के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
दरअसल, बजट में वित्त मंत्री ने देश में सात नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया है। इनमें मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, चेन्नई–हैदराबाद, बेंगलुरु–हैदराबाद, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी कॉरिडोर शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से दो कॉरिडोर उत्तर प्रदेश से होकर गुजरेंगे। इससे कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, गोरखपुर, मुरादाबाद और गाजियाबाद जैसे प्रमुख शहरों की कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली से वाराणसी के बीच प्रस्तावित हाईस्पीड कॉरिडोर के लखनऊ के रास्ते बनने की संभावना अधिक है। इससे पहले देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को दिल्ली से वाराणसी वाया लखनऊ चलाने की योजना थी, लेकिन अंतिम समय में यह ट्रेन पश्चिम बंगाल को दे दी गई। अब उम्मीद की जा रही है कि हाईस्पीड कॉरिडोर गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों को जोड़ते हुए वाराणसी तक पहुंचेगा। हालांकि, इस कॉरिडोर पर चलने वाली ट्रेनों के ठहराव वाले स्टेशनों को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कुछ तय नहीं हुआ है।
हाईस्पीड कॉरिडोर के शुरू होने के बाद यात्रियों के लिए समय की बचत सबसे बड़ा लाभ होगी। बुलेट ट्रेन की रफ्तार 300 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने से लखनऊ से दिल्ली की लगभग 490 किलोमीटर की दूरी महज दो घंटे में पूरी की जा सकेगी। ऐसे में यात्री सुबह दिल्ली जाकर शाम तक लखनऊ लौट सकेंगे। इसी तरह दिल्ली से वाराणसी का सफर भी केवल तीन घंटे में संभव हो जाएगा, जिससे यात्रा का समय मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले एक तिहाई रह जाएगा।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हाईस्पीड कॉरिडोर पर चलने वाली बुलेट ट्रेनों का किराया विमानों की तर्ज पर तय किया जाएगा। अनुमान है कि लखनऊ से दिल्ली का औसत किराया करीब पांच हजार रुपये हो सकता है। इसमें फ्लेक्सी प्राइसिंग भी लागू की जा सकती है, जिससे मांग के अनुसार किराये में उतार-चढ़ाव होगा। अधिकारियों के मुताबिक, विमान से दिल्ली जाने में बोर्डिंग, चेक-इन और यात्रा मिलाकर दो से तीन घंटे लग जाते हैं, ऐसे में हाईस्पीड रेल यात्रियों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन सकती है।
परियोजना के आकार की बात करें तो दिल्ली से वाराणसी के बीच हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की लंबाई लगभग 790 किलोमीटर होगी, जबकि वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच प्रस्तावित कॉरिडोर करीब 720 किलोमीटर लंबा होगा। इस तरह दिल्ली से सिलीगुड़ी तक वाराणसी के रास्ते बनने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर लगभग 1500 किलोमीटर लंबा होगा। इसके निर्माण पर करीब ढाई लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे उत्तर भारत और पूर्वी भारत के लिए रेल कनेक्टिविटी का गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
