नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि आगामी 21 जून को योग दिवस के अवसर पर वह यमुना किनारे योगा करेंगी। इस दौरान उन्होंने योग और आयुर्वेद के महत्व पर जोर दिया और पिछली सरकार पर योग को बढ़ावा न देने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब दिल्लीवासियों को योग के लिए कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि “दिल्ली के अपने आयुर्वेदिक अस्पताल हमारे पास हैं।” उन्होंने भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की सराहना करते हुए कहा, “देश में जितनी विधाएं हैं उनमें से भारत का कमांड ज्यादातर में है। हमारे ऋषियों मुनियों ने नाड़ी ज्ञान से किस तरह शरीर का इलाज हो सकता है, हमारे बीच मौजूद है।”
आयुर्वेदिक उपचार को एलोपैथी से बेहतर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में साइड इफेक्ट की गुंजाइश नहीं है। एलोपैथिक आपकी एक बीमारी को ठीक करता है लेकिन दूसरी बीमारी खड़ी हो जाती है।” उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि योग और आयुर्वेद को बढ़ाने के लिए जो भी जरूरत होगी, सरकार वह सब करेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 21 जून 2025 को पहली बार दिल्ली सरकार सरकारी मंचों से 11 जगहों पर कार्यक्रम का आयोजन करने वाली है। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “पिछली सरकार योग में मोदी जी को देखती थी, योग यानी मोदी जी। लेकिन योग तो विश्व के सभी देशों तक होने लगा है। मुझे अफसोस है, पिछली सरकार को योग में योग नहीं, पीएम का चेहरा दिखता था।”
उन्होंने आगे कहा कि पिछली सरकार का फर्ज बनता था कि योग को बढ़ावा देते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब जब पहली बार जनता की अपनी सरकार बनी है, तो सरकारी मंचों के साथ योग कार्यक्रम होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उनके पास खुद 150 से ज्यादा योग कार्यक्रमों के निमंत्रण हैं।
