76th Constitution Day: पीएम मोदी ने नागरिकों को पत्र लिखकर संविधान की भूमिका और ‘कर्तव्यों की प्रधानता’ पर दिया ज़ोर

76th Constitution Day: संविधान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए एक भावनात्मक पत्र जारी किया और संविधान की ऐतिहासिक यात्रा तथा उसकी राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका को रेखांकित किया।

Constitution Day 2025: PM Modi Focuses on Constitutional Role and Citizens' 'Duties' in Letter to the Public
Constitution Day 2025: PM Modi Focuses on Constitutional Role and Citizens' 'Duties' in Letter to the Public

76th Constitution Day: संविधान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए एक भावनात्मक पत्र जारी किया और संविधान की ऐतिहासिक यात्रा तथा उसकी राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने 26 नवंबर 1949 के उस दिन को याद किया जब संविधान सभा ने देश के लोकतांत्रिक चरित्र को परिभाषित करने वाले इस दस्तावेज़ को औपचारिक रूप से स्वीकार किया था। मोदी ने कहा कि संविधान के सम्मान और जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उनकी सरकार ने वर्ष 2015 में इस दिन को संविधान दिवस घोषित किया था।

अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने संविधान को ऐसी शक्ति बताया जिसने सामान्य परिवारों से आने वाले असंख्य भारतीयों को शीर्ष पदों तक पहुँचने का अवसर दिया। उन्होंने बताया कि संसद और संविधान के प्रति उनका सम्मान केवल शब्दों में नहीं बल्कि आचरण में भी झलकता है। उन्होंने 2014 में संसद भवन की सीढ़ियों को नमन करने और साल 2019 में संविधान को माथे से लगाने जैसे क्षणों को याद करते हुए कहा कि यह उनके मन में बसे लोकतांत्रिक सम्मान का प्रतीक था।

मोदी ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आम्बेडकर, पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और संविधान सभा की महिला सदस्यों सहित सभी योगदानकर्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि संविधान की विचारधारा ने राष्ट्र को दिशा दी है और इसने नागरिकों को सपने देखने और उन्हें साकार करने की शक्ति प्रदान की है।

प्रधानमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि यह वर्ष इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह कई ऐतिहासिक अवसरों के साथ मेल खाता है—सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष और गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं पुण्यतिथि। उन्होंने कहा कि ये सभी प्रतीक हमें संविधान में वर्णित कर्तव्यों की प्रासंगिकता और महत्व की याद दिलाते हैं। उन्होंने महात्मा गांधी का हवाला देते हुए कहा कि अधिकार तभी अर्थपूर्ण होते हैं जब नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं।

भविष्य की दिशा पर बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष और संविधान अपनाए जाने के शताब्दी वर्ष की ओर आगे बढ़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज बनाए जा रहे कानून, नीतियाँ और निर्णय अगले कई दशकों तक राष्ट्र की दिशा तय करेंगे। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए वे कर्तव्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

प्रधानमंत्री ने मतदान को नागरिक दायित्व का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए स्कूलों और कॉलेजों से यह अपील की कि वे संविधान दिवस पर पहली बार मतदान योग्य बने युवाओं का सम्मान करें, ताकि लोकतंत्र के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना और मजबूत हो।

पत्र के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से राष्ट्रीय कर्तव्यों के पालन की प्रतिबद्धता को दोहराने का आग्रह किया और कहा कि हर नागरिक का योगदान एक मजबूत, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।

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