महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को मराठी पहचान को लेकर अपना कड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव से ठीक पहले एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जनता और विपक्ष को यह साफ संदेश दिया कि नगर निकाय का नेतृत्व भविष्य में भी मराठियों के हाथों में ही रहेगा।
चुनाव के दौरान उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी द्वारा बार-बार यह दावा किया जा रहा था कि मुंबई में मराठी मानुष खतरे में है। इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि वास्तव में मराठी समुदाय का नहीं, बल्कि कुछ राजनीतिक ताकतों का अपना अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
चुनावों के बीच भाषा विवाद को लेकर भी राजनीति काफी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी पढ़ाने का निर्णय तभी स्वीकृत हो गया था जब राज्य में उद्धव ठाकरे की सरकार थी।
फडणवीस ने बताया कि उनकी वर्तमान सरकार ने इस पुराने निर्णय के अध्ययन के लिए केवल एक समिति का गठन किया है। उन्होंने विस्तार से जानकारी दी कि उद्धव ठाकरे के कार्यकाल के दौरान सितंबर 2021 में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसमें छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाएं पढ़ाने की सिफारिश की गई थी। इस रिपोर्ट को तत्कालीन उद्धव कैबिनेट ने ही 20 जनवरी 2022 को अपनी मंजूरी दी थी।
दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वर्तमान महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान मुंबई को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया है।
उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा कि अविभाजित शिवसेना ने पिछले 25 वर्षों में मुंबई के विकास के लिए जो भी कार्य किए थे, वर्तमान सरकार उन कार्यों को पूरी तरह नष्ट करने में जुटी हुई है। इस प्रकार बीएमसी चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी पहचान और भाषा के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है।
