रायपुर: बहुचर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाले मामले में पूर्व मुख्य सचिव और रिटायर्ड IAS अधिकारी आलोक शुक्ला ने रविवार को तीसरी बार ED की विशेष कोर्ट में सरेंडर किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसी मामले में रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा की भी जल्द गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को ED रिमांड पर सौंपा जाएगा। इस संबंध में कोर्ट में 28 दिन की रिमांड का आवेदन दायर किया गया है।
ED के वकील सौरभ पांडे ने जानकारी दी कि सरेंडर करने पहुंचे आलोक शुक्ला उस समय नान के चेयरमैन थे, जबकि अनिल टुटेजा सचिव के पद पर कार्यरत थे। अनिल टुटेजा पहले से जेल में हैं और आज उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर कोर्ट में पेश किया जाएगा। आरोपियों से पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने की प्रक्रिया चल रही है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही दोनों अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है। अदालत ने आदेश दिया है कि दोनों को पहले दो हफ्ते ईडी की कस्टडी में और उसके बाद दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहना होगा, तभी जमानत पर विचार किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों ने 2015 से चल रहे नान घोटाले और ईडी जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
नान घोटाला फरवरी 2015 में सामने आया था, जब ACB/EOW ने 25 परिसरों पर छापेमारी की थी। इस दौरान 3.64 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए और जांच में घटिया व मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त चावल और नमक मिलने की पुष्टि हुई थी। आरोप है कि राइस मिलों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और बदले में करोड़ों की रिश्वत ली गई। इस घोटाले में कई अफसरों और निगम अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई, जिनमें आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा का नाम प्रमुखता से सामने आया।
भूपेश बघेल सरकार में दोनों अफसरों को पॉवरफुल पोस्टिंग मिलने पर भी सवाल उठे थे। फिलहाल, कोर्ट की निगरानी में ED की कार्रवाई तेज हो गई है और नान घोटाले की जांच एक बार फिर सुर्खियों में है।
