Vodafone Idea AGR Case: सोमवार को वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर 9% से अधिक उछलकर 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सरकार को कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया की दोबारा समीक्षा करने की अनुमति दी है, जिसके बाद निवेशकों में उत्साह बढ़ा।
सुबह शेयर मामूली बढ़त के साथ ₹9.63 पर खुला और दिन में ₹10.53 तक पहुंच गया — जो इसका 52-सप्ताह का नया उच्च स्तर है। रिपोर्टिंग के समय तक शेयर ₹10.45 पर 8.63% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। कंपनी का मार्केट कैप ₹1.13 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जबकि आज 11.79 करोड़ शेयरों की भारी ट्रेडिंग हुई, जो दो हफ्तों के औसत 6.21 करोड़ से लगभग दोगुनी थी।
पिछले दो महीनों में वोडाफोन आइडिया का शेयर 72% चढ़ चुका है। अगस्त 2025 में यह ₹6.12 के 52-सप्ताह के निचले स्तर पर था। साल की शुरुआत से अब तक (YTD) स्टॉक 32% बढ़ा है, जबकि पिछले छह महीनों में 41% और सिर्फ एक महीने में 28% की तेजी आई है।
आखिर वोडाफोन आइडिया के शेयर क्यों चढ़े?
शेयर में उछाल की बड़ी वजह सुप्रीम कोर्ट का फैसला रहा, जिसने केंद्र सरकार (Central Government) को कंपनी के एजीआर बकाया की पुनः समीक्षा (Reassessment) की अनुमति दी।
गौरतलब है कि भारत सरकार इस समय कंपनी की सबसे बड़ी हिस्सेदार है — अप्रैल 2025 में उसने अपनी हिस्सेदारी 22% से बढ़ाकर 48.99% कर ली थी, जब स्पेक्ट्रम भुगतान बकाया को इक्विटी में बदला गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला सरकार की नीतिगत सीमा में आता है और अदालत को इसमें कोई आपत्ति नहीं है अगर केंद्र इस पर फिर से विचार करना चाहे।
पहले, 13 अक्टूबर को सुनवाई टलकर 27 अक्टूबर तय की गई थी। वोडाफोन आइडिया ने दूरसंचार विभाग (DoT) की ₹5,606 करोड़ की अतिरिक्त मांग को चुनौती दी थी, जो FY2016–17 तक की अवधि से संबंधित है।
कंपनी ने अदालत से अनुरोध किया है कि Deduction Verification Guidelines (3 फरवरी 2020) के तहत एजीआर बकाया की पुनः जांच और पुनर्मूल्यांकन किया जाए।
Vodafone Idea AGR Case: क्या है AGR विवाद?
एजीआर विवाद की जड़ 2019 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले में है, जब कोर्ट ने दूरसंचार विभाग (DoT) की व्याख्या को सही माना कि AGR में मुख्य और गैर-मुख्य दोनों आय को शामिल किया जाना चाहिए।
इस विवाद की शुरुआत इसलिए हुई क्योंकि दूरसंचार कंपनियां और डॉट (DoT) इस बात पर असहमत थीं कि लाइसेंस और स्पेक्ट्रम शुल्क किन राजस्व स्रोतों पर लगाया जाए।
सरकार का मत था कि एजीआर में ब्याज, डिविडेंड और एसेट सेल जैसी गैर-मुख्य आय भी शामिल होनी चाहिए। कोर्ट के फैसले के बाद कंपनियों पर भारी वित्तीय बोझ बढ़ गया, क्योंकि अब उन्हें ब्याज, पेनल्टी और बकाया का बड़ा हिस्सा चुकाना था।
2020 में सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए कंपनियों को 10 साल की किस्तों में भुगतान की अनुमति दी। अदालत ने निर्देश दिया कि बकाया का 10% मार्च 2021 तक और शेष राशि वित्त वर्ष 2030–31 तक हर साल समान किस्तों में चुकाई जाए।
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