New Labour Law: देश में नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी बदलाव भरी खबर सामने आई है। 9 से 5 की जॉब करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए यह राहत की खबर है। नौकरी पाना आसान नहीं है और अच्छे पदों के लिए कई उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है। प्राइवेट सेक्टर में नौकरी पाने के लिए इंटरव्यू पास करना और उपयुक्त सैलरी मिलना भी चुनौतियों भरा होता है।
हालांकि, नौकरी पाना मुश्किल होने के बाद भी यह कोई गारंटी नहीं कि आप लंबे समय तक उसी नौकरी में रहेंगे। कई लोग बेहतर ऑफर मिलने पर अपनी नौकरी छोड़ देते हैं। नौकरी छोड़ने के बाद फुल एंड फाइनल (एफएनएफ) सेटलमेंट के लिए अब तक कर्मचारियों को 30 से 60 दिनों तक इंतजार करना पड़ता था।
पहले अगर कोई कर्मचारी किसी कंपनी से इस्तीफा देता था या उसे कंपनी द्वारा निकाला जाता था, तो नियमों के अनुसार कंपनी को 30 दिन के भीतर कर्मचारी का FNF करना होता था। हालांकि, यह केवल नियम तक ही सीमित था। व्यवहार में अक्सर देखा जाता था कि कंपनियां इस प्रक्रिया में 45 से 60 दिन तक का समय लगा देती थीं। इस लंबी प्रतीक्षा अवधि के कारण कर्मचारियों को अपनी मेहनत की कमाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था।
लेकिन अब यह व्यवस्था पूरी तरह बदल रही है। सरकार नए लेबर कोड के तहत एक महत्वपूर्ण बदलाव लाई है जो कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है। अब सभी प्रकार के कर्मचारियों को उनके फुल एंड फाइनल सेटलमेंट की राशि मात्र दो वर्किंग डे (कार्य दिवस) के भीतर देनी होगी। यह नया नियम सभी स्थितियों पर लागू होगा, चाहे कर्मचारी अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहा हो, उसे कंपनी से निकाला जा रहा हो, या फिर वह रिट्रेंचमेंट (छंटनी) का शिकार हुआ हो।
यह बदलाव वेज कोड 2019 की धारा 17(2) के तहत किया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कर्मचारी के आखिरी काम वाले दिन के बाद अगले दो वर्किंग डे में उसकी पूरी बकाया सैलरी और अन्य देय राशि का भुगतान करना अनिवार्य है। इस सेटलमेंट में आमतौर पर नोटिस पीरियड की सैलरी, जमा छुट्टियों के पैसे (Leave Encashment), और बाकी सभी देय रकम शामिल होती है। हालांकि, ग्रेच्युटी जैसे मामलों के लिए नियम पहले की तरह ही रहेंगे। यह नया नियम यह सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से इंतजार न करना पड़े और कंपनियां उनका वेतन न रोक पाएं।
