नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच गहराते सैन्य तनाव का सीधा असर अब भारतीय आसमान और आम यात्रियों पर दिखने लगा है। सुरक्षा कारणों से कई देशों द्वारा अपना हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) अस्थायी रूप से बंद किए जाने के बाद भारत से उड़ान भरने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का शेड्यूल पूरी तरह बिगड़ गया है। शनिवार को हालात उस वक्त गंभीर हो गए जब अचानक बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने के कारण देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर हजारों यात्री फंस गए।
सुरक्षा के मद्देनजर इराक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जॉर्डन और सीरिया जैसे देशों ने अपने हवाई क्षेत्र में आवाजाही सीमित कर दी है। चूंकि यूरोप और खाड़ी देशों के लिए अधिकांश उड़ानें इन्हीं रास्तों से गुजरती हैं, इसलिए एयरलाइंस को मजबूरन अपने रूट बदलने पड़े हैं या उड़ानों को पूरी तरह रोकना पड़ा है। इस अनिश्चितता के कारण मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा और कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों की भारी भीड़ और लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
एयरपोर्ट पहुंचे कई यात्रियों को ऐन वक्त पर फ्लाइट रद्द होने की सूचना मिली, जिससे भ्रम और नाराजगी की स्थिति पैदा हो गई। कई यात्री अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट मिस कर चुके हैं, जबकि अन्य वैकल्पिक उड़ानों या रिफंड का इंतजार कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर भी इसका व्यापक असर दिखा है; दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े एविएशन हब पर भी उड़ानों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवाई यातायात संकट में है।
इस संकट के बीच डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। सरकार ने एयरलाइंस को निर्देश दिए हैं कि वे यात्रियों को समय पर अपडेट दें और रिफंड या नई तारीख का विकल्प उपलब्ध कराएं। फंसे हुए लोगों की सहायता के लिए हेल्प डेस्क और कस्टमर सपोर्ट टीमों की संख्या भी बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता और हवाई मार्ग सुरक्षित नहीं होते, तब तक हवाई यात्रा में यह अनिश्चितता बनी रह सकती है। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे घर से निकलने से पहले एयरलाइन की वेबसाइट या हेल्पलाइन से अपनी उड़ान की स्थिति जरूर जांच लें।
