Indigo Flight Crisis: सातवें दिन भी 350 उड़ानें रद्द, हाई-प्रोफाइल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स पर उठे गंभीर सवाल

Indigo Flight Crisis: इंडिगो एयरलाइंस का ऑपरेशनल संकट सातवें दिन भी जारी है। सोमवार को भी करीब 350 उड़ानें रद्द हो गईं, जिसके बाद यात्रियों में नाराज़गी और गुस्सा साफ दिखाई दिया। अब तक 3,900 से ज़्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और एयरपोर्ट्स पर अफरातफरी का माहौल बना हुआ है।

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Indigo Flight Crisis: इंडिगो एयरलाइंस का ऑपरेशनल संकट सातवें दिन भी जारी है। सोमवार को भी करीब 350 उड़ानें रद्द हो गईं, जिसके बाद यात्रियों में नाराज़गी और गुस्सा साफ दिखाई दिया। अब तक 3,900 से ज़्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और एयरपोर्ट्स पर अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठाने लगे हैं कि आखिर इतनी बड़ी एयरलाइन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स क्या कर रहे थे और क्या वे इस संकट के दौरान सो रहे थे।

इंडिगो की ओर से 7 दिसंबर को जारी बयान में दावा किया गया कि संकट शुरू होने के पहले ही दिन बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने स्थिति पर निगरानी शुरू कर दी थी। कंपनी के बोर्ड में एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ, पूर्व नीति आयोग सीईओ और जी20 शेरपा अमिताभ कांत, सेबी के पूर्व चेयरमैन एम. दामोदरन और एफएए के पूर्व एडमिनिस्ट्रेटर माइकल व्हिटेकर जैसे दिग्गज शामिल हैं।

संकट बढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगे कि इतने बड़े नामों के बावजूद एयरलाइन स्थिति को संभालने में असफल क्यों रही। पूर्व अधिकारी और व्हिसलब्लोअर अशोक खेमा ने कहा कि हाई प्रोफाइल बोर्ड आखिर चुप क्यों है और क्या वे इस संकट के लिए जिम्मेदार नहीं हैं? कई अन्य लोग भी पूछ रहे हैं कि बोर्ड के सदस्य इस गंभीर हालात पर कोई बयान क्यों नहीं दे रहे।

कंपनी के CEO पियटर एल्बर्स की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि CEO बोर्ड के निर्देश पर ही काम कर रहे हैं, इसलिए बोर्ड इससे अलग नहीं हो सकता। राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने कहा कि बोर्ड में शामिल जी20 प्रतिनिधि ने संकट पर एक ट्वीट तक नहीं किया, जो हैरानी की बात है।

इसी बीच बिज़नेस टुडे के ग्रुप एडिटर सिद्धार्थ जराबी ने यह दावा किया कि शुरुआत में ही बोर्ड का दखल कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं बल्कि चिंता और घबराहट का संकेत था। उनका कहना है कि केवल बोर्ड हेड्स के बीच आपसी बातचीत और बाद में CEO को शामिल करना यह दिखाता है कि स्थिति जल्द ही नियंत्रण से बाहर हो गई थी।

अब यह सवाल भी बड़े स्तर पर उठ रहा है कि इतना अनुभवी बोर्ड पहले से अलर्ट क्यों नहीं था। जनवरी 2024 से ही एयरलाइन में क्रू की कमी और शेड्यूलिंग के मुद्दों को लेकर चेतावनी थी, फिर भी बोर्ड मीटिंग तब ही हुई जब हालात बिगड़ चुके थे।

यात्रियों का गुस्सा अब भी शांत नहीं हुआ है। देशभर के एयरपोर्ट से वीडियो सामने आ रहे हैं, जहां लोग एयरलाइन स्टाफ से बहस कर रहे हैं और कई घंटों तक फंसे रहने की शिकायत कर रहे हैं। सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई है, जिसकी रिपोर्ट 15 दिनों में DGCA को सौंपी जाएगी। DGCA ने इंडिगो CEO को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय और दिया है।

इंडिगो जैसी मजबूत और अनुभवी नेतृत्व वाली कंपनी के लिए यह स्थिति असामान्य और चुनौतीपूर्ण है। अब सवाल यह है कि क्या बोर्ड समय रहते इस संकट को संभाल पाएगा या फिर यह समस्या रनवे से लेकर बोर्डरूम तक फैल चुकी है।

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