Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को आम बजट पेश करते हुए देश में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की बड़ी घोषणा की। इन प्रस्तावित परियोजनाओं में वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भी शामिल है, जो उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक बिहार के कई प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा। इस कॉरिडोर के बनने से बिहार की रेल कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार देखने को मिलेगा।
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 700 किलोमीटर होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इससे न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि माल ढुलाई सेवाओं में भी तेजी आएगी, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी।
यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बिहार के कई अहम शहरों से होकर गुजरेगा। प्रस्तावित रूट के अनुसार, यह बक्सर, आरा, पटना, कटिहार और किशनगंज जैसे प्रमुख रेलवे केंद्रों को जोड़ेगा। रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि इस कॉरिडोर पर ट्रेनें 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं, जिससे बिहार की रेल यात्रा देश के सबसे आधुनिक नेटवर्क में शामिल हो जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना से सबसे अधिक लाभ बिहार को मिलने की संभावना है और पटना व कटिहार जैसे शहर इस रूट पर बड़े ट्रांजिट हब के रूप में उभर सकते हैं।
रेलवे बोर्ड के पूर्व प्रधान मुख्य कार्यकारी निदेशक ए.के. चंद्र ने इस परियोजना को बिहार के लिए एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि तेज कनेक्टिविटी से बड़े शहरी केंद्रों के साथ संपर्क मजबूत होगा, जिससे पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच भी आसान होगी।
ए.के. चंद्र ने यह भी बताया कि रेलवे पहले से ही दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन–पटना–झाझा मेनलाइन पर तीसरी और चौथी रेल पटरियां बिछाने की योजना पर काम कर रहा है। इस विस्तार परियोजना की अनुमानित लागत करीब 17,000 करोड़ रुपये है और इसका उद्देश्य देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक पर भीड़ को कम करना है। इस योजना के लिए फंड आवंटित किया जा चुका है और काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और अतिरिक्त पटरियों के संयुक्त प्रभाव से रेल संचालन अधिक सुचारू होगा, ट्रेनों की देरी कम होगी और पूरे नेटवर्क की दक्षता में सुधार आएगा। इसके साथ ही वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी जैसे शहरों के बीच आसान और तेज आवागमन से पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी नया बल मिलने की संभावना है।
कुल मिलाकर, वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को बिहार के लिए एक गेम-चेंजर परियोजना माना जा रहा है, जो राज्य की कनेक्टिविटी, अर्थव्यवस्था और विकास की रफ्तार को नई दिशा दे सकता है।
