सावधान! कल थम जाएंगे ओला, उबर और रैपिडो के पहिए; 7 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान

ओला, उबर और रैपिडो जैसे कैब, बाइक टैक्सी और ऑटो सेवाएं देने वाले ऐप्स पर काम करने वाले चालकों की यूनियनों ने देशभर में हड़ताल का ऐलान किया है। यह हड़ताल शनिवार, 7 फरवरी को होगी और इसका नेतृत्व तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) करेगी।

ओला, उबर और रैपिडो जैसे कैब, बाइक टैक्सी और ऑटो सेवाएं देने वाले ऐप्स पर काम करने वाले चालकों की यूनियनों ने देशभर में हड़ताल का ऐलान किया है। यह हड़ताल शनिवार, 7 फरवरी को होगी और इसका नेतृत्व तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) करेगी। यूनियन का दावा है कि इस आंदोलन में पूरे भारत के ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स शामिल होंगे। चालकों की प्रमुख मांग है कि सरकार न्यूनतम किराए को लेकर स्पष्ट अधिसूचना जारी करे, ताकि कंपनियां मनमाने तरीके से किराया तय न कर सकें।

यूनियन नेताओं ने बुधवार को कहा कि लंबे समय से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे चालकों की आमदनी लगातार घटती जा रही है। इससे पहले 31 दिसंबर को भी जोमैटो, ब्लिंकिट, जेप्टो, इंस्टामार्ट और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले गिग वर्कर्स ने कम भुगतान और खराब कार्य परिस्थितियों के खिलाफ प्रदर्शन किया था और नए साल के दिन हड़ताल पर गए थे।

हड़ताल के पीछे की वजहों को लेकर टीजीपीडब्ल्यूयू ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में यूनियन ने देशभर के ऐप-आधारित परिवहन कर्मचारियों से जुड़े “लंबे समय से लंबित और अब तक अनसुलझे मुद्दों” की ओर सरकार का ध्यान दिलाया है। यूनियन का कहना है कि ओला, उबर, रैपिडो और पोर्टर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले ऑटो, कैब और बाइक टैक्सी चालकों के लिए कोई नियमित और तय किराया ढांचा मौजूद नहीं है। ऐसे में कंपनियां एकतरफा तरीके से किराया निर्धारित करती हैं, जिसका सीधा नुकसान चालकों को उठाना पड़ता है।

यूनियन के मुताबिक, इस व्यवस्था की वजह से लाखों ट्रांसपोर्ट वर्कर्स को गंभीर आय असुरक्षा, शोषण और अस्थिर कामकाजी हालात का सामना करना पड़ रहा है। पत्र में मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 का भी हवाला दिया गया है, जिनमें किराए में पारदर्शिता, नियामक निगरानी और चालकों की आजीविका के संरक्षण का प्रावधान किया गया है। यूनियन ने मांग की है कि इन दिशानिर्देशों को तुरंत लागू किया जाए।

टीजीपीडब्ल्यूयू ने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं के लिए न्यूनतम आधार किराए को तत्काल अधिसूचित किया जाए। यूनियन का कहना है कि यह किराया तय करते समय मान्यता प्राप्त चालक और कर्मचारी यूनियनों से परामर्श किया जाना चाहिए, ताकि निर्णय संतुलित और व्यवहारिक हो। इसके अलावा, यूनियन ने यात्री और माल परिवहन के लिए निजी वाहनों के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगाने या फिर ऐसे वाहनों को अनिवार्य रूप से वाणिज्यिक श्रेणी में लाने की भी मांग की है।

अगर यह हड़ताल व्यापक स्तर पर सफल रहती है, तो 7 फरवरी को कई शहरों में कैब, बाइक टैक्सी और ऑटो सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं, जिसका सीधा असर यात्रियों पर भी पड़ने की संभावना है।

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