Magh Gupt Navratri 2026: सनातन परंपरा में शक्ति की साधना के लिए वर्ष में चार नवरात्रि मानी जाती हैं। इनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्रि साधारण रूप से मनाई जाती हैं, जबकि माघ और आषाढ़ की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों के स्थान पर दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। इसे साधना सिद्धि के लिए अत्यंत विशेष समय माना गया है।
गुप्त नवरात्रि 2026 कब है?
- प्रारंभ: 19 जनवरी 2026
- समापन: 27 जनवरी 2026
मान्यता है कि इन नौ दिनों में की गई शक्ति उपासना से साधक की इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और मन में स्थित बाधाएँ दूर होती हैं। इस पावन अवधि में कुछ नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण माना गया है।
माघ गुप्त नवरात्रि में पालन किए जाने वाले प्रमुख नियम
(1) पूजा और व्रत में नियमिता रखें
यदि आप व्रत कर रहे हैं तो पूजा, जप, आरती व ध्यान प्रतिदिन एक निश्चित समय पर पूर्ण श्रद्धा से करें।
(2) प्रतिदिन देवी विशेष की आराधना
गुप्त नवरात्रि में हर दिन अलग देवी की पूजा होती है, इसलिए विधि अनुसार पूजन और बीज मंत्र का जप अवश्य करें।
(3) बाल-दाढ़ी-नाखून न काटें
साधकों को इस अवधि में बाल, दाढ़ी और नाखून कटवाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह तपस्या व संयम का काल माना गया है।
(4) पवित्रता और वेशभूषा का ध्यान
साधक को प्रतिदिन स्नान कर स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। गुप्त नवरात्रि में काले रंग के कपड़े पहनने और चमड़े से बनी वस्तुओं (जैसे बेल्ट, जूते या पर्स) का प्रयोग करने से बचना चाहिए।
(5) ब्रह्मचर्य का पालन
महाविद्या साधना करने वालों के लिए ब्रह्मचर्य अत्यंत आवश्यक माना गया है। किसी भी प्रकार की गलत भावना रखने से साधना का फल कम हो जाता है।
(6) साधना को गुप्त रखें
गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली साधना का प्रदर्शन न करें। मान्यता है कि साधना जितनी गुप्त रहेगी, देवी की कृपा उतनी अधिक मिलेगी।
(7) कन्या पूजन का महत्व
व्रत के दौरान यदि संभव हो तो प्रतिदिन एक कन्या का पूजन करें, अन्यथा अष्टमी या नवमी तिथि को नौ कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाकर भोजन कराएं और उपहार देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
(8) अंतिम दिन मंदिर में अर्पण
साधना के अंतिम दिन यानी 27 जनवरी 2026 को किसी देवी मंदिर में जाकर नारियल, चुनरी और श्रृंगार सामग्री अर्पित करनी चाहिए।
(9) हवन और विसर्जन के नियम
पूजा के समापन पर हवन और आरती अवश्य करें। इस वर्ष एक विशेष बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि व्रत का समापन मंगलवार को हो रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजन सामग्री को जल में विसर्जित नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, अगले दिन यानी बुधवार को सामग्री को किसी स्वच्छ स्थान पर भूमि में दबा देना श्रेष्ठ माना गया है।
माघ गुप्त नवरात्रि साधना, संयम और श्रद्धा का पर्व है। उचित नियमों के पालन से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
