वॉशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर फिर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी सांसद यास्मीन अंसारी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोएरे को भेजा गया ट्रंप का एक पत्र सार्वजनिक किया है, जिसमें ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर नाराजगी जताई थी। पत्र सामने आते ही अमेरिकी राजनीति में बहस और तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।
सांसद यास्मीन अंसारी ने पत्र पोस्ट करते हुए लिखा कि अमेरिका ऐसे राष्ट्रपति के हाथों में है, जो मानसिक रूप से ठीक नहीं हैं और देश को खतरे में डाल सकते हैं। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व से संविधान के 25वें संशोधन को लागू करने की अपील की है। इस संशोधन के तहत यदि राष्ट्रपति की स्थिति उपयुक्त न हो तो उनकी शक्तियां अस्थायी रूप से उपराष्ट्रपति को सौंप दी जाती हैं।
The president of the United States is extremely mentally ill and it’s putting all of our lives at risk. The 25th Amendment exists for a reason—we need to invoke it immediately. pic.twitter.com/HaywXdWxDK
— Congresswoman Yassamin Ansari (@RepYassAnsari) January 19, 2026
विवाद में आया यह पत्र ट्रंप ने उस समय लिखा था जब नोबेल कमेटी ने उन्हें शांति पुरस्कार नहीं दिया था। पत्र में ट्रंप ने लिखा था कि:
“आपके देश ने आठ युद्धों को रोकने के मेरे प्रयासों के बावजूद मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया। इसलिए अब मुझे केवल शांति पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। शांति महत्वपूर्ण रहेगी, लेकिन अब मेरा लक्ष्य अमेरिका के हित में कदम उठाना है।”
ट्रंप के इस बयान को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति की भाषा और दृष्टिकोण कूटनीतिक मर्यादाओं से परे है। विरोधी दलों का आरोप है कि यह रवैया अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि ट्रंप समर्थक इसे राजनीतिक एजेंडा बताते हुए खारिज कर रहे हैं।
25वें संशोधन की उठी मांग
सांसद यास्मीन अंसारी ने इस पत्र को ट्रंप के “असंतुलित व्यवहार” का प्रमाण बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति की मानसिक हालत ठीक नहीं है और वे पूरे देश को जोखिम में डाल रहे हैं। यास्मीन ने अमेरिकी नेतृत्व से संविधान का 25वां संशोधन लागू करने की अपील की है, ताकि राष्ट्रपति की शक्तियां उपराष्ट्रपति को ट्रांसफर की जा सकें और संभावित खतरे को टाला जा सके।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद दरअसल ट्रंप की उस व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से जुड़ा है जिसमें वे खुद को दुनिया के सबसे बड़े शांति दूत के रूप में देखना चाहते थे। लेकिन नॉर्वे की नोबेल कमेटी द्वारा उन्हें नजरअंदाज किए जाने के बाद, उनके ताजा पत्र ने एक नई कूटनीतिक बहस छेड़ दी है। आलोचकों का मानना है कि एक राष्ट्रपति का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार न मिलने पर ऐसा रवैया अपनाना देश की छवि को नुकसान पहुँचा सकता है।
