Noida Software Engineer Death: उत्तर प्रदेश के नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने प्रशासनिक लापरवाही और रेस्क्यू सिस्टम की गंभीर खामियों को सामने ला दिया है। 16-17 जनवरी की रात, घने कोहरे के बीच युवराज की कार सेक्टर-150 स्थित एक निर्माणाधीन स्थल पर पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई। आरोप है कि मौके पर प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौजूद होने के बावजूद समय रहते उन्हें बचाया नहीं गया।
इस हादसे के बाद यूपी सरकार ने कार्रवाई करते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को निलंबित कर दिया। उन्हें नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी पद से भी हटा दिया गया। इसके अलावा तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है, जो पांच दिनों में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी। जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया और ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़े अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं।
हालांकि, आम आदमी पार्टी ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली इकाई के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि आईएएस अधिकारियों का हर कुछ साल में ट्रांसफर होना कोई सख्त कार्रवाई नहीं मानी जा सकती। भारद्वाज ने नोएडा की डीएम मेधा रूपम पर सीधे जिम्मेदारी तय करने की मांग की और आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।
“Big Action” 🙄
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) January 20, 2026
Is transfer even an Action ?
IAS officers naturally get transferred every 2-3 years. CEO of Noida Lokesh M had already completed his 2.5 yrs.
DM of Noida Medha Rupam is the one who is actually responsible for SDRF & rescue operations. And she is being… https://t.co/G5riHDz6Wd pic.twitter.com/hiWeKLnXgY
AAP नेता ने कहा, “नोएडा की DM मेधा रूपम ही असल में SDRF और रेस्क्यू ऑपरेशन की जिम्मेदार हैं, लेकिन उन्हें बचाया जा रहा है।” उन्होंने आगे लिखा, “नोएडा की DM, जिनके अंडर रेस्क्यू ऑपरेशन और SDRF आते हैं, ECI ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। ऐसे में भ्रष्ट IAS अधिकारियों पर केस चलाना मुश्किल है। दोषी ठहराना तो दूर, पूरा सिस्टम ही खराब है।”
युवराज मेहता की मौत कैसे हुई?
16-17 जनवरी की रात युवराज अपने गुरुग्राम स्थित ऑफिस से सेक्टर-150 लौट रहे थे। घने कोहरे और कम विजिबिलिटी के कारण उनकी मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा अनियंत्रित होकर टूटी हुई बाउंड्री वॉल से टकराई और 30 से 70 फीट गहरे, पानी से भरे गड्ढे में गिर गई।
जान बचाने के लिए युवराज किसी तरह कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़ गए, जहां वे करीब 90 से 120 मिनट तक फंसे रहे। इस दौरान उन्होंने अपने पिता को फोन कर मदद की गुहार लगाई और मोबाइल की टॉर्च जलाकर इशारे किए। मौके पर पुलिस और रेस्क्यू टीम मौजूद थी, लेकिन किसी ने उन्हें बचाने की कार्रवाई नहीं की।
युवराज की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह एस्फिक्सिया यानी दम घुटना और कार्डियक अरेस्ट बताई गई है। इस हादसे ने नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर उस स्थिति में जब इलाके में निर्माण कार्य चल रहा था और सुरक्षा इंतजाम नाकाफी थे। पुलिस और रेस्क्यू टीम की मौजूदगी के बावजूद युवक की जान न बच पाना सिस्टम की बड़ी विफलता मानी जा रही है।
