‘अधिकारी तमाशा देखते रहे और मैं कूद गया’: नोएडा हादसे के चश्मदीद मोनिंदर का दर्दनाक खुलासा

नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता को भी पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद और ‘रियल लाइफ हीरो’ मोनिंदर ने किया है।

Noida Tragedy Eyewitness Speaks: “Officers Watched as I Jumped” in Yuvraj Engineer Death Case
Noida Tragedy Eyewitness Speaks: “Officers Watched as I Jumped” in Yuvraj Engineer Death Case

नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता को भी पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद और ‘रियल लाइफ हीरो’ मोनिंदर ने किया है। फ्लिपकार्ट में डिलीवरी एग्जीक्यूटिव का काम करने वाले मोनिंदर ने कड़कड़ाती ठंड में युवराज को बचाने के लिए उस गहरे गड्ढे में छलांग लगाई थी, लेकिन उनके द्वारा लगाए गए आरोप प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हैं।

मोनिंदर का दावा है कि जब वह मौके पर पहुंचे, तब प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीम वहां पहले से मौजूद थी। उन्होंने एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर बयान किया कि युवराज उस समय जीवित थे, कार की छत पर लेटे हुए थे और मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद की गुहार लगा रहे थे। मोनिंदर के अनुसार, सुरक्षा उपकरणों और सीढ़ियों से लैस होने के बावजूद अधिकारी किनारे खड़े होकर केवल तमाशा देखते रहे और किसी ने भी पानी में उतरने की हिम्मत नहीं की। मोनिंदर का सीधा सवाल है कि जब सिस्टम के पास संसाधन थे, तो उन्होंने युवराज को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की और एक नागरिक को जोखिम उठाने के लिए क्यों कहा गया।

इस घटना ने नोएडा अथॉरिटी की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। जिस जगह पर पिछले 15 सालों से कोई सुरक्षा घेरा नहीं था, वहां युवराज की मौत के बाद रातों-रात 16 लोहे की बैरिकेडिंग लगा दी गई हैं। स्थानीय निवासी और इस हादसे में पहले बाल-बाल बचे ट्रक ड्राइवर गुरिंदर ने बताया कि 15 दिन पहले भी उनका ट्रक इसी गड्ढे में गिरा था। तब मदद करने के बजाय अथॉरिटी के अधिकारियों ने उल्टा उन पर ही दीवार तोड़ने का आरोप लगा दिया था। अगर उस समय प्रशासन ने सबक लिया होता और वहां रिफ्लेक्टर या बैरिकेड्स लगाए होते, तो शायद आज युवराज जीवित होते।

युवराज के घर में जल्द ही शहनाइयां बजने वाली थीं, लेकिन अब वहां मातम पसरा है। उनके 65 वर्षीय पिता का इकलौता सहारा छिन चुका है। मोनिंदर, जिन्होंने युवराज के पिता की बेबसी को करीब से देखा है, अब न्याय की मांग कर रहे हैं और कह रहे हैं कि वह सच बोलने से पीछे नहीं हटेंगे। फिलहाल, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और वे पूछ रहे हैं कि विकास के नाम पर खोदे गए इन गहरे गड्ढों और सुरक्षा में हुई इस आपराधिक लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन है।

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