ईरान में गहराते आर्थिक संकट और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर हो रहे जन-आंदोलन के बीच अमेरिका ने तेहरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश विभाग और ट्रेजरी विभाग ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरानी अधिकारियों द्वारा अपने ही नागरिकों के खिलाफ की जा रही हिंसा और क्रूर दमन की कड़ी निंदा की है। वॉशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि वह ईरानी लोगों के लोकतांत्रिक संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा है और इस दमन के लिए जिम्मेदार शासन को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह अलग-थलग कर देगा।
इस ताजा कार्रवाई के तहत अमेरिका ने ईरान के कई उच्च पदस्थ सुरक्षा अधिकारियों को काली सूची में डाल दिया है। इनमें ‘सुप्रीम काउंसिल फॉर नेशनल सिक्योरिटी’ के सचिव अली लारिजानी का नाम प्रमुखता से शामिल है। इसके अतिरिक्त, कुख्यात ‘फरदीस जेल’ को भी प्रतिबंधित किया गया है, जहाँ महिलाओं के साथ अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार की रिपोर्टें सामने आई हैं। ट्रेजरी विभाग ने ईरान के उस विशाल ‘शैडो बैंकिंग’ नेटवर्क पर भी प्रहार किया है, जो तेल और पेट्रोकेमिकल की बिक्री से होने वाली अरबों डॉलर की कमाई की मनी लॉन्ड्रिंग कर शासन की दमनकारी गतिविधियों के लिए धन जुटाता है। इस नेटवर्क से जुड़े 18 व्यक्तियों और संस्थाओं पर सीधी कार्रवाई की गई है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सुरक्षा टीम ईरान की पल-पल की स्थिति पर नजर रख रही है। ट्रंप ने ईरानी शासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्याओं का सिलसिला नहीं रुका, तो इसके गंभीर और विनाशकारी नतीजे भुगतने होंगे। अमेरिकी प्रशासन ने संदेश दिया है कि उनके पास सैन्य कार्रवाई समेत सभी विकल्प मेज पर हैं। ट्रंप ने पहले भी कहा था कि वे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे और जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाएंगे।
ईरान में यह उबाल दिसंबर से शुरू हुआ था, जब बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की अत्यधिक लागत ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया। धीरे-धीरे यह आंदोलन शासन विरोधी प्रदर्शनों में तब्दील हो गया। शासन ने इस विद्रोह को कुचलने के लिए देशभर में इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया है, ताकि दुनिया को हो रही हिंसा की जानकारी न मिल सके। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों और रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में अब तक मरने वालों की संख्या बेहद भयावह हो चुकी है। कुछ अनुमानों के अनुसार यह आंकड़ा 3,000 से लेकर 12,000 के पार पहुँच चुका है, जो ईरान के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी हिंसा बताई जा रही है।
ट्रंप प्रशासन अपनी ‘अधिकतम दबाव’ (Maximum Pressure) की नीति के तहत ईरान के तेल निर्यात और उसकी वित्तीय पहुंच को पूरी तरह रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिका का मानना है कि इन प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था और अधिक कमजोर होगी, जिससे शासन को अपनी नीतियों और दमनकारी रवैये पर पुनर्विचार करने के लिए विवश होना पड़ेगा।
