कितना खतरनाक है USS अब्राहम लिंकन? ईरान की ओर तेज़ी से बढ़ रहा अमेरिका का सबसे ताकतवर युद्धपोत

USS अब्राहम लिंकन एक निमित्ज क्लास न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसका वजन 1 लाख टन से भी ज्यादा है। परमाणु ऊर्जा से चलने के कारण इसे बार-बार ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे यह महीनों तक समुद्र में तैनात रह सकता है।

USS Abraham Lincoln
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वाशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट में गहराते युद्ध के संकट और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पेंटागन ने अपनी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति को सक्रिय कर दिया है। अमेरिकी नौसेना का सबसे शक्तिशाली युद्ध समूह, USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (CSG-3), दक्षिण चीन सागर से अपना रास्ता बदलकर अब तेजी से मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धपोत समूह अकेला ही किसी भी देश की पूरी सेना के बराबर तबाही मचाने की क्षमता रखता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका अपने हितों की सुरक्षा और इजरायल को संभावित ईरानी हमलों से बचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

एक तैरता हुआ अभेद्य किला: क्या है इसकी ताकत?

USS अब्राहम लिंकन एक निमित्ज क्लास न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसका वजन 1 लाख टन से भी ज्यादा है। परमाणु ऊर्जा से चलने के कारण इसे बार-बार ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे यह महीनों तक समुद्र में तैनात रह सकता है। इस स्ट्राइक ग्रुप के मुख्य बेड़े में 1-2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (वर्जीनिया या लॉस एंजेलिस क्लास) और आर्लिघ बर्क-क्लास के 3 से 4 गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स शामिल हैं। पूरे बेड़े में करीब 8 हजार सैनिक और मरीन तैनात हैं, जो किसी भी समय बड़े हमले के लिए तैयार रहते हैं।

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आसमान का बेताज बादशाह: घातक लड़ाकू विमानों का दस्ता

इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की सबसे घातक मारक क्षमता इसके एयर विंग 9 (CVW-9) में छिपी है, जिसमें 70 के करीब अत्याधुनिक विमान तैनात हैं। इसमें F-35C लाइटनिंग II जैसे स्टील्थ फाइटर जेट्स शामिल हैं, जो दुश्मन के रडार की नजर में आए बिना हमला कर सकते हैं। साथ ही, इसमें F/A-18 सुपर हॉर्नेट, रडार जाम करने वाले EA-18G ग्राउलर और समुद्री शिकार के लिए सीहॉक हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं। यह ग्रुप एक दिन में 150 से ज्यादा लड़ाकू उड़ानें भरने में सक्षम है, जो दुश्मन की हवाई रक्षा प्रणाली को मिनटों में ध्वस्त कर सकती हैं।

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मारक हथियार: सैकड़ों टोमाहॉक और मिसाइल डिफेंस

हथियारों के मामले में यह बेड़ा किसी काल से कम नहीं है। इसमें तैनात सैकड़ों टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी से दुश्मन के तेल डिपो, न्यूक्लियर साइट्स और सैन्य मुख्यालयों को सटीक निशाना बना सकती हैं। खुद की सुरक्षा के लिए इस पर Phalanx CIWS और SM-6 जैसी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणालियां लगी हैं, जो आने वाली किसी भी दुश्मन मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर देती हैं। इस ग्रुप का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर अपना नियंत्रण स्थापित करना और ईरान की सैन्य गतिविधियों पर लगाम लगाना है।

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भारत पर प्रभाव और वैश्विक चिंता

अगले एक हफ्ते के भीतर यह पूरा बेड़ा मध्य-पूर्व पहुँच जाएगा। इस भारी सैन्य तैनाती का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ना तय है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति पर पड़ेगा। भारत सरकार इस तेजी से बदलती सामरिक स्थिति पर पैनी नजर रख रही है, क्योंकि यह क्षेत्र न केवल ऊर्जा आपूर्ति बल्कि लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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