Iran US Tensions: नई दिल्ली में कूटनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव और संभावित महायुद्ध की आशंका के बीच भारत को लेकर अंतरराष्ट्रीय रुचि बढ़ी है। इसी स्थिति में ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को अचानक फोन किया। इस बातचीत में ईरान और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में बिगड़ते हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। यह कॉल ऐसे समय पर आई है जब इजरायली हमलों की खबरें दुनिया भर में सुर्खियां बना रही हैं और हालात बेहद गंभीर होते जा रहे हैं। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस महत्वपूर्ण बातचीत की पुष्टि भी की है। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी जयशंकर से बात कर चुके हैं, जिससे यह साफ है कि भारत की भूमिका को लेकर वॉशिंगटन और तेहरान दोनों की निगाहें नई दिल्ली पर टिकी हैं।
इस बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है—क्या ईरान पर अमेरिकी हमले की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है? मीडिया रिपोर्ट्स में दावा है कि इजरायली प्रधानमंत्री का विशेष विमान उड़ चुका है, जबकि कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य बलों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे माहौल में ईरान का भारत से बातचीत करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अराघची ने जयशंकर को क्षेत्रीय सुरक्षा की बदलती स्थिति से अवगत कराया है। भारत ने हमेशा इस इलाके में शांति और कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया है और इसी वजह से इस समय उसकी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।
Received a call from Iranian Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi. @araghchi
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) January 14, 2026
We discussed the evolving situation in and around Iran.
तेहरान से आया यह फोन कॉल कई संकेत छिपाए हुए है। भारत के ईरान और इजरायल दोनों से पुराने और मजबूत संबंध हैं। इसी वजह से भारत की सलाह और मध्यस्थता तनाव कम करने में वास्तविक योगदान दे सकती है। संभव है कि तेहरान इस संकट में भारत से कूटनीतिक सहयोग या मध्यस्थता चाहता हो।
दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के संबंधों में तनाव पहले ही चरम पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के 50 बड़े सैन्य ठिकानों की एक सूची सौंपी गई है, जिसमें रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और बासिज़ के अहम ठिकाने शामिल हैं। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर प्रदर्शनकारियों को फांसी दी जाती रही, तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा। उन्होंने ईरानी प्रदर्शनकारियों को यह संदेश भी दिया है कि “मदद रास्ते में है।”
रणनीतिक मोर्चे पर भी तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। मध्य पूर्व के सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे अल-उदेद (कतर) से अमेरिकी सैनिकों को हटाने का आदेश दिया गया है। वहीं इजरायली प्रधानमंत्री का विमान ‘विंग ऑफ सियोन’ उड़ चुका है जिसे अक्सर बड़े सैन्य फैसलों से पहले का संकेत माना जाता है। उधर ईरान ने भी चेतावनी दी है कि यदि हमला हुआ तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा।
इन सभी घटनाक्रमों के बीच दुनिया की निगाहें अब भारत पर हैं—क्योंकि यदि हालात नियंत्रण से बाहर हुए, तो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी वैश्विक भू-राजनीतिक टकराहट सामने आ सकती है। नई दिल्ली क्या भूमिका निभाएगा, इस पर आने वाले कुछ दिन काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
