ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में जो भी अस्थिरता और अशांति दिखाई दे रही है, उसके पीछे बाहरी शक्तियों का हाथ है। पेजेश्कियान इससे पहले भी दंगाइयों और आतंकवादियों की आड़ में समाज को अस्थिर करने वालों की निंदा कर चुके हैं।
इस बार पेजेश्कियान पहली बार प्रदर्शनकारियों के समर्थन में स्पष्ट रूप से सामने आए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन इसलिए हो रहे हैं क्योंकि आम लोगों की आवाज नहीं सुनी गई। उन्होंने माना कि समाज के हर वर्ग की बात सुनना ज़रूरी है और इस समस्या का समाधान निकलना अनिवार्य है। इसके साथ उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका और इजरायल दंगों को भड़काकर ईरान में अफरा-तफरी फैलाना चाहते हैं और देश के नागरिकों से अपील की कि वे दंगाइयों और आतंकवादियों से दूरी बनाकर रखें।
11 जनवरी 2026 को अपने देश को संबोधित करते हुए पेजेश्कियान ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि सरकार उनकी मांगों और चिंताओं पर ध्यान देगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि दंगाइयों को समाज में गड़बड़ी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकारी टीवी को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ने कहा कि ईरानियों को दंगाइयों को समाज को नुकसान पहुंचाने की इजाज़त नहीं देनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सरकार न्याय चाहती है और उसे जनता की बेचैनी का अहसास है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए तैयार है, अधिकारी उनकी बातें सुनेंगे, लेकिन दंगाई पूरे समाज को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस बीच ईरान में एक कड़े कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सुलतानी को आज फांसी दी जा सकती है। इरफान को 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और 11 जनवरी को मौत की सजा सुनाई गई। उन पर हिंसा भड़काने और ‘खुदा के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में आगे कोई ट्रायल नहीं होगा और परिवार को सिर्फ 10 मिनट की अंतिम मुलाकात की अनुमति दी गई है।
