पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले, केंद्र सरकार ने सतर्कता बढ़ाई

Nipah Virus West Bengal: भारत में निपाह वायरस की आहट ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया है।

West Bengal Reports Two Possible Nipah Virus Cases, Centre Steps Up Alert
West Bengal Reports Two Possible Nipah Virus Cases, Centre Steps Up Alert

Nipah Virus West Bengal: भारत में निपाह वायरस की आहट ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया है। यह वायरस दुनिया के सबसे घातक ज़ूनोटिक संक्रमणों में से एक माना जाता है, जिसकी मृत्यु दर बहुत अधिक है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से फोन पर बात कर राज्य को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया है।

केंद्र सरकार ने इस संभावित खतरे से निपटने के लिए तेजी से कदम उठाते हुए ‘नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पांस टीम’ का गठन किया है। विशेषज्ञों की यह टीम पश्चिम बंगाल पहुंचकर स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर निगरानी और कांटेक्ट ट्रेसिंग का काम कर रही है। इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य की ‘इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम’ (IDSP) यूनिट को आवश्यक केंद्रीय गाइडलाइंस भी जारी कर दी हैं, ताकि संक्रमण की कड़ी को शुरुआती स्तर पर ही तोड़ा जा सके।

निपाह वायरस मुख्य रूप से जानवरों, विशेषकर फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्रूट बैट्स) से इंसानों में फैलता है। इसकी पहचान पहली बार 1999 में मलेशिया में हुई थी। यह वायरस संक्रमित चमगादड़ों द्वारा झूठे किए गए फलों को खाने, संक्रमित सूअरों के संपर्क में आने या संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से तेजी से फैल सकता है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जिनमें बुखार, सिरदर्द, खांसी और गले में खराश शामिल हैं। हालांकि, स्थिति गंभीर होने पर मरीज को सांस लेने में कठिनाई, मानसिक भ्रम, बेहोशी और मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) जैसी जानलेवा समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

वर्तमान में निपाह वायरस के लिए कोई विशिष्ट दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसका उपचार मुख्य रूप से ‘सपोर्टिव केयर’ जैसे ऑक्सीजन सपोर्ट और शरीर में पानी की कमी को रोकने पर आधारित होता है। ऐसी स्थिति में बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग जमीन पर गिरे या पक्षियों द्वारा कुतरे गए फलों का सेवन न करें, चमगादड़ों और सूअरों के संपर्क से बचें तथा साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। किसी भी संदिग्ध लक्षण के दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श और जांच अनिवार्य है।

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