नई दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने जमीन के बदले नौकरी (Land for Job) घोटाले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को लालू यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने के आरोप तय किए हैं।
अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान बेहद सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि यह केवल कुछ अलग-अलग लेनदेन का मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित आपराधिक गतिविधि है। न्यायाधीश ने माना कि लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने एक ‘आपराधिक सिंडिकेट’ की तरह काम किया और इस पूरे घोटाले को अंजाम देने के लिए एक व्यापक साजिश रची गई थी। अदालत के अनुसार, सभी आरोपियों की भूमिकाएं आपस में जुड़ी हुई थीं और उन्होंने एक साझा उद्देश्य के साथ काम किया।
इस मामले में कुल 103 आरोपी शामिल थे, जिनमें से पांच की मौत हो चुकी है। कोर्ट ने आज शेष 98 आरोपियों में से 52 लोगों को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। हालांकि, लालू यादव के परिवार के सदस्यों और कुछ रेलवे अधिकारियों सहित कुल 46 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मानते हुए उन पर आरोप तय किए गए हैं। बरी किए गए लोगों में वे शामिल हैं जिनके खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य पर्याप्त नहीं पाए गए।
यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे के विभिन्न जोन में नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों और उनके परिवारों से बेहद कम कीमत पर जमीनें लालू परिवार के नाम कराई गईं। अब आरोप तय होने के बाद इस मामले में नियमित ट्रायल (मुकदमा) शुरू होगा, जिसमें गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। राजनीतिक रूप से इसे तेजस्वी यादव और राजद के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, विशेषकर आगामी चुनाव तैयारियों के बीच।
