वंदे मातरम् पर संसद में तीखी बहस: ओवैसी, रूहुल्लाह, इकरा और इंजीनियर रशीद ने सरकार पर सांप्रदायिकीकरण का आरोप लगाया

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी, JKNC सांसद आग़ा सैयद रूहुल्लाह, कैराना से सांसद इकरा हसन और बारामूला से सांसद इंजीनियर रशीद सहित कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह वंदे मातरम् को देशभक्ति की कसौटी बनाने की कोशिश कर रही है और इसका सांप्रदायिकरण हो रहा है।

Vande Mataram Row: Owaisi, Ruhullah, Iqra, and Er. Rashid Slam Government in Parliament, Alleging Communal Agenda
Vande Mataram Row: Owaisi, Ruhullah, Iqra, and Er. Rashid Slam Government in Parliament, Alleging Communal Agenda

Vande Mataram Controversy: संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को वंदे मातरम् को लेकर जोरदार राजनीतिक बहस देखने को मिली। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी, JKNC सांसद आग़ा सैयद रूहुल्लाह, कैराना से सांसद इकरा हसन और बारामूला से सांसद इंजीनियर रशीद सहित कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह वंदे मातरम् को देशभक्ति की कसौटी बनाने की कोशिश कर रही है और इसका सांप्रदायिकरण हो रहा है।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि देश को माता या देवी के रूप में संबोधित करना धार्मिक स्वरूप पैदा करता है, जो संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा, “यह वतन मेरा है, हम इसे छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। लेकिन अगर भारत माता को देवी की तरह पेश किया जाएगा, तो धर्म को इसमें लाया जाएगा। संविधान देश के प्रति निष्ठा की बात करता है, किसी देवी की पूजा की नहीं। हुकूमत जोर-जबरदस्ती न करे, यह संविधान के खिलाफ है।” ओवैसी ने यह भी कहा कि मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाना उचित नहीं, क्योंकि “हम अपनी मां की इबादत नहीं करते, हम कुरान की भी पूजा नहीं करते, और इस्लाम में अल्लाह के सिवा कोई खुदा नहीं है। वतन से मोहब्बत हमारी है, लेकिन वफादारी का सर्टिफिकेट हमसे मत लीजिए।”

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से JKNC सांसद आग़ा सैयद रूहुल्लाह ने भी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि वंदे मातरम् का मुद्दा एक व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए मुस्लिम पहचान को नियंत्रित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को थोपना और बुलडोजर कार्रवाई जैसे कदम अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं बल्कि सत्ता का एक पैटर्न दिखाते हैं। उन्होंने कहा, “मुसलमानों ने देश की आजादी के लिए लड़ा है। अब हम देश के अंदर की आजादी के लिए लड़ सकते हैं। असहमति को गद्दारी न बनाएं।”

कैराना से सांसद इकरा हसन ने वंदे मातरम् के सांप्रदायिकरण का विरोध करते हुए कहा कि मुस्लिम भारतीय होने का निर्णय “चॉइस” है, “चांस” नहीं। इकरा ने कहा, “हम मुसलमान भारतीय हैं, चॉइस से हैं। वंदे मातरम् को थोपना या इसे सांप्रदायिक रंग देना गीत के मूल भाव के खिलाफ है।” उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि वाजपेयी ने सुनिश्चित किया था कि वंदे मातरम् किसी पर थोपा न जाए, बल्कि लोग इसे सम्मानपूर्वक गाएं।

बारामूला के सांसद इंजीनियर रशीद ने दावा किया कि कश्मीर को “भारत का ताज तो माना गया लेकिन कभी इज्जत नहीं दी गई।” उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करके केंद्र सरकार ने उनकी मातृभूमि से सब कुछ छीन लिया। उन्होंने कहा, “देश ने कभी हमें अपना नहीं माना। यहां मुसलमानों को गैर-मुल्क का कहा जाता है।” रशीद ने अपनी मातृभूमि को सलाम करते हुए कहा कि कश्मीरियों से किए गए वादे पूरे नहीं हुए।

विवाद को और बढ़ाते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमानों के लिए वंदे मातरम् में इस्तेमाल धार्मिक संदर्भ इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, “मुसलमानों को मर जाना मंजूर है, लेकिन शिर्क नहीं। वतन से मोहब्बत अलग है, उसकी पूजा अलग। हर मुसलमान देश से मोहब्बत करता है, लेकिन इबादत सिर्फ अल्लाह की करता है।” मौलाना साजिद रशीदी ने भी कहा कि किसी को आपत्ति ‘देश’ से नहीं बल्कि ‘देश को भगवान बनाने’ से है। वहीं सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने दावा किया कि गीत में मुस्लिम धर्म के खिलाफ शब्द हैं।

वंदे मातरम् पर संसद की यह बहस एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि क्या राष्ट्रगीत को देशभक्ति की कसौटी के रूप में पेश किया जाना चाहिए, या यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है। राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों के बीच, यह मुद्दा लगातार देश की संसद और समाज दोनों में गरमाहट पैदा कर रहा है।

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