वॉशिंगटन: कैरेबियन सागर में संदिग्ध ड्रग तस्करी करने वालों पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद अब हालात और गंभीर हो गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि देश बहुत जल्द वेनेजुएला में जमीनी सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को ड्रग तस्करी का सरगना बताते हुए उन्हें सत्ता छोड़ने की चेतावनी दी है। ट्रंप के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना को वेनेजुएला में मौजूद उन लोगों के ठिकानों की जानकारी है जो ड्रग कारोबार में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब सिर्फ समुद्री अभियान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि जमीन पर भी कार्रवाई करने जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान की शुरुआत जल्द ही की जाएगी और इससे ड्रग माफिया को खत्म करने में मदद मिलेगी।
अमेरिकी सरकार के इस बयान के पीछे कैरेबियन सागर में हाल ही में हुए उस विवादित सैन्य अभियान को भी माना जा रहा है जिसमें कथित ड्रग तस्करी वाली नावों पर अमेरिकी सेना ने हमला किया था। इस अभियान में 80 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। अब इस मामले की जांच हो रही है और अमेरिकी सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं।
बताया गया कि 2 सितंबर को अमेरिकी सेना ने एक संदिग्ध नाव पर दो बार हमला किया था। आरोप है कि पहली बार हमला करने के बाद जब सभी लोग नहीं मरे तो दूसरी बार हमला किया गया। यह घटना मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच चिंता का विषय बनी हुई है।
ट्रंप ने इन आरोपों से खुद को और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ को अलग बताया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें दूसरे हमले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। ट्रंप का कहना है कि हेगसेथ ने केवल पहला हमला लाइव देखा था और उसके बाद वे आगे की मीटिंग में चले गए थे। हेगसेथ ने भी सफाई देते हुए कहा कि उन्हें दूसरे हमले की जानकारी घंटों बाद मिली और उन्होंने किसी को जीवित नहीं देखा।
दूसरी ओर, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई को जबरन सत्ता पलटने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि देश की सेना और नागरिक किसी भी बाहरी हमले का मुकाबला करेंगे।
अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका वास्तव में वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप करेगा या यह केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है। लेकिन एक बात साफ है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक सुरक्षा के लिए अहम मुद्दा बन सकता है।
