एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद अशोक सिंघल की पोस्ट से नया विवाद, ‘गोभी की खेती’ टिप्पणी पर बवाल

Gobi Farming Post Controversy: अशोक सिंघल की इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर आक्रोश की लहर दौड़ा दी। कुछ ही समय बाद उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की चुनावी रणनीति की भी प्रशंसा की। हालांकि उनके पहले वाले बयान को लेकर विपक्ष खास तौर पर हमलावर हो गया है।

BJP Leader Ashok Singhal Faces Backlash for 'Gobi Ki Kheti' Comment Amidst Celebration of NDA's Historic Victory
BJP Leader Ashok Singhal Faces Backlash for 'Gobi Ki Kheti' Comment Amidst Celebration of NDA's Historic Victory

Gobi Farming Post Controversy: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे गठबंधन में उत्साह का माहौल है। बीजेपी और जेडीयू के नेता बड़ी जीत का जश्न मना रहे हैं, लेकिन इस बीच असम सरकार के कैबिनेट मंत्री अशोक सिंघल की एक पोस्ट ने तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

सिंघल ने सोशल मीडिया पर गोभी के खेत की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा— “बिहार में गोभी की खेती को मंजूरी।” उनकी इस टिप्पणी को तुरंत 1989 के भयावह भागलपुर दंगों से जोड़कर देखा जाने लगा, जहां लोगैन गांव में बड़ी संख्या में मुसलमानों की हत्या के बाद शवों को खेत में दफनाया गया था और ऊपर से फूलगोभी के पौधे लगाए गए थे। यह दंगा भारतीय इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक रहा है, जिसमें आधिकारिक रूप से एक हजार से अधिक लोगों की मौत दर्ज हुई, जबकि असल संख्या 2,000 से भी अधिक बताई जाती है।

अशोक सिंघल की इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर आक्रोश की लहर दौड़ा दी। कुछ ही समय बाद उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की चुनावी रणनीति की भी प्रशंसा की। हालांकि उनके पहले वाले बयान को लेकर विपक्ष खास तौर पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इसे अत्यंत अशोभनीय और शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह पोस्ट असम की संस्कृति, समाज और उसके उदार इतिहास का अपमान है। गोगोई ने सीधे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को इस ‘नफरत फैलाने वाली मानसिकता’ को बढ़ावा देने का जिम्मेदार बताया और कहा कि असम की धरती शंकरदेव, लचित बोरफुकन और अजान पीर की है, न कि ऐसे नेताओं की जो समाज को बांटने वाली भाषा का इस्तेमाल करें।

कांग्रेस के किशनगंज सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा-आरएसएस अपने समर्थकों को सिर्फ मुस्लिम विरोधी भावनाएं उकसाकर ही साथ रखने की कोशिश करती है। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने सिंघल की पोस्ट को “हिंसा भड़काने वाली” बताकर इसकी निंदा की। हेगड़े ने कहा कि इस तरह का वक्तव्य किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अस्वीकार्य है और यह शपथ का उल्लंघन है।

बिहार की चुनावी जीत के बीच उठे इस विवाद ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे बयान बहुसंख्यक–अल्पसंख्यक के बीच दूरी बढ़ाने का काम करते हैं, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से अभी तक इस पोस्ट पर कोई स्पष्ट सफाई सामने नहीं आई है। यह मामला आने वाले दिनों में और राजनीतिक ताप पैदा कर सकता है।

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