नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आईएसआईएस विचारधारा फैलाने और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की साजिश के आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “संदेश देने के लिए यह सबसे अच्छी सुबह है।” यह टिप्पणी उस समय आई जब आरोपी के वकील ने लाल किला धमाके की हालिया घटना का हवाला देते हुए कहा कि आज इस मामले पर सुनवाई करना उपयुक्त नहीं है। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद जैसे मामलों में यही सही समय है जब सख्त संदेश दिया जाना चाहिए।
UAPA के तहत दर्ज मामला, हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती थी याचिका
आरोपी पर गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत मुकदमा दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट में दायर यह याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ थी, जिसमें आरोपी को जमानत देने से इनकार किया गया था। आरोपी दो साल से अधिक समय से जेल में बंद है और उस पर आईएसआईएस की विचारधारा को बढ़ावा देने और युवाओं को आतंक की राह पर भड़काने का आरोप है।
कोर्ट ने कहा — ट्रायल दो साल में पूरा करें
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि इस मामले में हम हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि अब तक 64 में से 19 गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि ट्रायल दो साल के भीतर पूरा किया जाए।
दो साल में ट्रायल पूरा न हुआ तो फिर से कर सकेगा जमानत की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभियोजन और बचाव पक्ष को ट्रायल में पूर्ण सहयोग करना होगा। यदि दो साल के भीतर सुनवाई पूरी नहीं होती और देरी आरोपी की वजह से नहीं होती, तो उसे दोबारा जमानत की मांग करने की स्वतंत्रता होगी।
“यह सबसे अच्छी सुबह है संदेश देने की” — जस्टिस मेहता
सुनवाई की शुरुआत में जब वकील ने लाल किला धमाके का हवाला देते हुए कहा कि “आज इस मामले पर बहस के लिए यह अच्छी सुबह नहीं है”, तो जस्टिस मेहता ने जवाब दिया — “संदेश देने के लिए यह सबसे अच्छी सुबह है।” वहीं, जस्टिस नाथ ने कहा कि यह स्वीकार किया गया तथ्य है कि आरोपी के पास से भड़काऊ सामग्री बरामद हुई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है।
