Tulsi Vivah 2025: 1 या 2 नवंबर, कब है तुलसी-शालिग्राम विवाह? नोट करें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष तुलसी विवाह पर दो शुभ योग भी बन रहे हैं। दोपहर 1 बजे से रात 10:33 बजे तक त्रिपुष्कर योग, और रात 10:34 बजे से अगले दिन सुबह 5:34 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इन दुर्लभ योगों के कारण इस बार तुलसी विवाह का महत्व और बढ़ गया है।

Tulsi Vivah 2025: Find Out the Correct Date and Shubh Muhurat for the Tulsi-Shaligram Wedding (AI IMAGE)
Tulsi Vivah 2025: Find Out the Correct Date and Shubh Muhurat for the Tulsi-Shaligram Wedding (AI IMAGE)

Tulsi Vivah 2025: देवउठनी एकादशी के ठीक अगले दिन, यानी 2 नवंबर 2025 (रविवार) को हिंदू धर्म का एक बहुत ही खास त्योहार तुलसी विवाह मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन बहुत ही पवित्र और शुभ होता है क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा (चातुर्मास) के बाद जागते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम का विवाह तुलसी देवी (वृंदा) के साथ पूरे विधि-विधान से कराया जाता है।

तुलसी विवाह को कार्तिक मास की सबसे शुभ तिथियों में से एक माना जाता है, और यह माना जाता है कि इस विवाह से जीवन में वैवाहिक सुख, सफलता और शांति बनी रहती है।

देवउठनी एकादशी तक विवाह, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, लेकिन तुलसी विवाह के बाद सभी शुभ कार्यों के मुहूर्त शुरू हो जाते हैं। इसीलिए इसे नए शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

कब है तुलसी विवाह और शुभ मुहूर्त?

इस बार तुलसी-शालिग्राम विवाह के अवसर पर दो बहुत ही शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस पूजा का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है:

  • सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 5 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह तक रहेगा।
  • त्रिपुष्कर योग: 2 नवंबर को दोपहर करीब 1 बजे से लेकर रात 10 बजकर 33 मिनट तक।

इस बार बन रहे हैं दो दुर्लभ शुभ योग

इस वर्ष तुलसी विवाह पर दो शुभ योग भी बन रहे हैं। दोपहर 1 बजे से रात 10:33 बजे तक त्रिपुष्कर योग, और रात 10:34 बजे से अगले दिन सुबह 5:34 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इन दुर्लभ योगों के कारण इस बार तुलसी विवाह का महत्व और बढ़ गया है।

तुलसी विवाह की सरल पूजा विधि

तुलसी विवाह की विधि-विधान में सबसे पहले घर की सफाई की जाती है और पूजा करने वाला व्यक्ति पीले वस्त्र धारण करता है। घर के द्वार पर रंगोली बनाई जाती है और लाल कपड़े से मंडप सजाया जाता है। तुलसी के पौधे और भगवान शालिग्राम को मंडप में विराजमान किया जाता है। तुलसी माता को लाल चुनरी ओढ़ाई जाती है और शालिग्राम जी को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। इसके बाद दोनों को फूलों की माला पहनाकर सात फेरे कराए जाते हैं।

अंत में परिवार के सभी सदस्य आरती करते हैं, फूलों की वर्षा करते हैं और भगवान विष्णु तथा तुलसी माता से सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। इसके बाद मिठाई और मौसमी फलों का भोग लगाया जाता है। तुलसी विवाह न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है बल्कि यह जीवन में प्रेम, संतुलन और सौहार्द का संदेश भी देता है।

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