US Fed Rate Cut: फेड का बड़ा फैसला! अमेरिका में फिर ब्याज दरों में कटौती, जानिए भारत पर क्या पड़ेगा असर

एलान के बाद फेड ने एक स्टेटमेंट के जरिए कहा कि अमेरिका की आर्थिक गतिविधि मध्यम गति से बढ़ रही है। इस साल नौकरी की वृद्धि धीमी हुई है और बेरोजगारी दर थोड़ा बढ़ी है, लेकिन अभी भी कम है। महंगाई दर साल की शुरुआत की तुलना में बढ़ी है और ऊंची बनी हुई है।

US Fed Rate Cut: Fed Makes Big Decision, Slashes Interest Rates Again—What is the Impact on India?
US Fed Rate Cut: Fed Makes Big Decision, Slashes Interest Rates Again—What is the Impact on India?

US Fed Rate Cut: अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ने बाजार के अनुमान के मुताबिक ही बेंचमार्क पॉलिसी रेट्स में कटौती का एलान कर दिया है। फेड ने प्रमुख दरों में चौथाई फीसदी यानी 0.25 फीसदी की कटौती की है। यह इस साल की दूसरी कटौती है। इस कटौती के बाद पॉलिसी रेट्स घटकर 3.75 फीसदी से 4 फीसदी के दायरे में आ गए हैं।

बैठक में रेट कटौती का फैसला 10-2 के मतदान से हुआ। फेडरल रिजर्व का एक सदस्य दरों में कटौती के पक्ष में नहीं था, वहीं एक सदस्य आधा फीसदी की कटौती के पक्ष में था। एलान के साथ दिए गए स्टेटमेंट में दिसंबर पॉलिसी बैठक की दिशा का कोई संकेत नहीं दिया गया। इससे पहले सितंबर की बैठक में अधिकारियों ने इस साल दरों में 3 बार की कटौती की संभावना जताई थी। अब अगली बैठक दिसंबर में होगी। नतीजों के एलान के बाद अमेरिकी बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

फेडरल रिजर्व ने क्या कहा?

एलान के बाद फेड ने एक स्टेटमेंट के जरिए कहा कि अमेरिका की आर्थिक गतिविधि मध्यम गति से बढ़ रही है। इस साल नौकरी की वृद्धि धीमी हुई है और बेरोजगारी दर थोड़ा बढ़ी है, लेकिन अभी भी कम है। महंगाई दर साल की शुरुआत की तुलना में बढ़ी है और ऊंची बनी हुई है।

समिति का लक्ष्य अधिकतम रोजगार और 2% की स्थिर मुद्रास्फीति बनाए रखना है। फेड ने बताया कि हाल के महीनों में रोजगार से जुड़े जोखिम बढ़े हैं, इसलिए यह निर्णय जोखिमों को संतुलित करने और अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए लिया गया है। फेड आने वाले आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक परिस्थितियों पर नज़र रखेगा।

पॉवेल के बयान के बाद मार्केट में उतार-चढ़ाव

दरों में कटौती के बाद अमेरिकी बाजारों में शुरुआत में बढ़त देखने को मिली थी, लेकिन फेडरल रिजर्व प्रमुख जेरोम पॉवेल के बयान के बाद गिरावट आई। पॉवेल ने कहा कि कमेटी में दिसंबर में दरों के फैसले को लेकर काफी मतभेद हैं और फिलहाल यह कहा नहीं जा सकता है कि इस साल आगे दरों में कटौती होगी या नहीं। इस बयान के बाद अमेरिकी शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव दिखा।

आंकड़ों की कमी के बीच फैसला

सरकारी शटडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था से जुड़े कई आंकड़े सामने नहीं आए हैं। हालांकि, फेडरल रिजर्व ने कहा कि फैसला लेने के लिए आंकड़ें पर्याप्त हैं। अमेरिका में शटडाउन के दौरान ब्यूरो और लेबर का आधिकारिक डेटा ज्यादातर बंद कर दिया गया था। सितंबर महीने की महंगाई दर की रिपोर्ट भी देरी से आई। फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने कहा था कि फिलहाल, नीति तय करने के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों स्रोतों से पर्याप्त जानकारी मौजूद है।

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