भिवंडी विवाद: अबू कासिम आज़मी ने मराठी में बोलने से इनकार किया, MNS ने ‘स्टाइल’ में जवाब देने की चेतावनी दी

आज़मी भिवंडी में कल्याण-रोड चौड़ीकरण रोकने की मांग के सिलसिले में पहुंचे थे — तभी स्थानीय मीडिया और कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे। घटना के वीडियो और बातचीत की क्लिप सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई हैं, जिससे विवाद को और बढ़ावा मिला है।

Bhiwandi Row: Abu Asim Azmi Refuses to Speak Marathi; MNS Threatens to Retaliate in 'Style'
Bhiwandi Row: Abu Asim Azmi Refuses to Speak Marathi; MNS Threatens to Retaliate in 'Style'

मुंबई/भिवंडी: समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू कासिम (अबू आसिम) आज भिवंडी में मराठी-हिंदी विवाद के चलते फिर सुर्खियों में आए। भिवंडी में कल्याण-रोड चौड़ीकरण के विरोध को लेकर पहुंचे आज़मी से स्थानीय मराठी चैनलों ने मराठी में जवाब मांगते हुए प्रश्न किया, तो उन्होंने मराठी में बोलने से इनकार कर दिया — और कहा कि “मराठी और हिंदी में क्या अंतर है, अगर मैं मराठी में जवाब दूँ तो दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लोग कैसे समझ पाएंगे।”

अबू आज़मी के इस बयान के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के ठाणे जिला अध्यक्ष परेश चौधरी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि भिवंडी में राजनीति करते हुए मराठी न बोलना स्वीकार्य नहीं है; यदि उन्हें मराठी बोलने में शर्म आती है तो उन्हें “मनसे स्टाइल” में जवाब दिया जाएगा — इस चेतावनी ने माहौल को गर्म कर दिया।

आज़मी भिवंडी में कल्याण-रोड चौड़ीकरण रोकने की मांग के सिलसिले में पहुंचे थे — तभी स्थानीय मीडिया और कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे। घटना के वीडियो और बातचीत की क्लिप सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई हैं, जिससे विवाद को और बढ़ावा मिला है।

यह मराठी-भाषा विवाद नया नहीं है — पिछले कुछ महीनों में मनसे के कार्यकर्ताओं द्वारा मराठी न बोलने पर दुकानदारों/व्यापारियों के साथ की गई हरकतों और मामलों की खबरें सामने आई हैं। कुछ इलाकों में मनसे कार्यकर्ताओं पर हमले-धक्‍कियों और तोड़फोड़ की घटनाओं की भी रिपोर्ट्स रही हैं, जिनकी वजह से इलाके में तनाव बना रहता है।

धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों पर भी आज़मी ने हाल ही में तेज़ बयानबाज़ी की थी — ‘I Love Muhammad’ बैनर विवाद पर उन्होंने सरकार और पुलिस के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं के मामले में सख्त कानून की जरूरत है और मुसलमानों की आस्था को चुनौती देना उचित नहीं। इस बयान ने पहले भी राजनीतिक बहस छेड़ दी थी।

स्थानीय नेताओं और प्रशासन को चाहिए कि वे भाषायी संवेदनशीलता के साथ-साथ कानून और सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दें। किसी भी विवाद का समाधान संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया से होना चाहिए—भीड़ या धमकियों से नहीं।

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