पाकिस्तान-सऊदी अरब ने किया रणनीतिक रक्षा समझौता, किसी भी हमले को साझा खतरे के रूप में माना जाएगा

यह समझौता भारत के लिए भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है। हाल ही में, मई में पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। यह 1999 के बाद दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच सबसे बड़ी झड़प थी।

Pakistan and Saudi Arabia Sign Strategic Defense Pact, Will Treat Any Attack as a Shared Threat
Pakistan and Saudi Arabia Sign Strategic Defense Pact, Will Treat Any Attack as a Shared Threat

रियाद: पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार, 17 सितंबर को एक बड़ा ‘रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता’ किया है। यह समझौता दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नया आयाम देता है, क्योंकि इसके तहत किसी भी एक देश पर होने वाले हमले को दूसरे पर हमला माना जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे नाटो (NATO) गठबंधन में होता है।

इस समझौते पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की रियाद यात्रा के दौरान सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और उन्होंने हस्ताक्षर किए। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब मध्य-पूर्व में इजराइल द्वारा कतर में हमास नेताओं पर किए गए हमले के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बढ़ गई हैं।

Pakistan and Saudi Arabia Sign Strategic Defense Pact, Will Treat Any Attack as a Shared Threat

समझौते की मुख्य बातें

समझौते के अनुसार, इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना और किसी भी आक्रामकता के खिलाफ संयुक्त प्रतिरोध को बढ़ाना है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि यह समझौता दोनों देशों की सुरक्षा को बढ़ाने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि “किसी भी देश के खिलाफ कोई भी आक्रामकता दोनों के खिलाफ आक्रामकता मानी जाएगी।”

Pakistan and Saudi Arabia Sign Strategic Defense Pact, Will Treat Any Attack as a Shared Threat

भारत के लिए निहितार्थ

यह समझौता भारत के लिए भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है। हाल ही में, मई में पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। यह 1999 के बाद दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच सबसे बड़ी झड़प थी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सऊदी अरब यात्रा भी बीच में ही रद्द कर दी थी।

भारत और सऊदी अरब के बीच भी मजबूत आर्थिक संबंध हैं। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और पेट्रोलियम के लिए सऊदी अरब पर काफी निर्भर है, जो उसका तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। वहीं, पाकिस्तान के 2.5 मिलियन से अधिक नागरिक सऊदी अरब में काम करते हैं, और सऊदी अरब लंबे समय से पाकिस्तान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को आर्थिक सहायता देता रहा है। यह नया रक्षा समझौता इन जटिल भू-राजनीतिक समीकरणों में एक नया तत्व जोड़ता है।

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