कोपेनहेगन: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने ग्रीनलैंड को लेकर आई हालिया रिपोर्टों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड की राजनीतिक व्यवस्था या डेनमार्क के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप कतई स्वीकार्य नहीं है।
यह बयान उस समय आया जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाए गए कि अमेरिका से जुड़े तीन नागरिक ग्रीनलैंड में कथित रूप से निजी नेटवर्क खड़े करने और स्थानीय नेताओं की निगरानी जैसी गुप्त गतिविधियों में शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य यह आकलन करना बताया जा रहा है कि कौन नेता अमेरिकी प्रभाव के पक्ष में हैं और कौन विरोध में।
फ्रेडरिक्सन का सख्त संदेश: “डेनमार्क की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं”
फ्रेडरिक्सन ने पत्रकारों से कहा, “यह हमारे लिए बेहद गंभीर मामला है। ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है और उसके लोकतांत्रिक ढांचे में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि अब तक अमेरिका की ओर से इन रिपोर्टों का स्पष्ट खंडन नहीं हुआ है, जो अपने आप में चिंता की बात है।
अमेरिकी अधिकारियों से सीधी बातचीत
जानकारी के अनुसार, फ्रेडरिक्सन ने हाल ही में ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ड की मौजूदगी में अमेरिकी सीनेटरों के साथ इस मुद्दे को उठाया। उनका कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियों पर वॉशिंगटन को स्पष्ट संदेश भेजा जाएगा कि यह डेनमार्क के लिए अस्वीकार्य है। इसी क्रम में, डेनमार्क के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि अमेरिकी राजदूत को तलब कर इन रिपोर्टों पर चर्चा की गई है। यह कदम विवाद को और गंभीर बना रहा है।
ट्रंप के दौर से रही दिलचस्पी
खबरों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान और उसके बाद भी ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की इच्छा जताई थी। उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि आवश्यकता पड़ी तो आर्थिक या सैन्य दबाव के जरिये भी इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
