नीति आयोग ने अहमदाबाद में ‘अनुसंधान और विकास में सुगमता’ पर परामर्श बैठक का आयोजन किया

सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर.ए. माशेलकर ने अपने मुख्य भाषण में अनुसंधान एवं विकास परिदृश्य का आकलन किया, प्रमुख कमियों की पहचान की और प्रगति के लिए कार्रवाई योग्य रणनीतियों का सुझाव दिया।

NITI Aayog's Consultation Meeting on R&D in Ahmedabad Concludes
NITI Aayog's Consultation Meeting on R&D in Ahmedabad Concludes

नीति आयोग ने 12–13 अगस्त 2025 को अहमदाबाद के साइंस सिटी में गुजरात विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (गुजकॉस्ट) की मेजबानी में ‘अनुसंधान और विकास में सुगमता’ पर पांचवीं परामर्श बैठक आयोजित की। इसमें 110 से अधिक प्रतिभागियों, शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान संस्थानों के प्रमुखों तथा नीति निर्माताओं ने अनुसंधान और नवाचार को मज़बूत करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। बैठक का उद्देश्य प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम करना, ज्ञान संसाधनों तक पहुंच और संस्थागत प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना, अनुवादात्मक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और देश में अनुसंधान एवं विकास के लिए अधिक सक्षम वातावरण को बढ़ावा देना था।

बैठक की शुरुआत गुजकॉस्ट के सलाहकार और सदस्य सचिव डॉ. नरोत्तम साहू के स्वागत भाषण से हुई। नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार प्रो. विवेक कुमार सिंह ने भारत में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए संरचनात्मक सुधारों, चुस्‍त नियमों और मज़बूत संस्थागत ढांचे की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। राज्य की विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव सुश्री पी. भारती ने प्रधानमंत्री के विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप एक मजबूत अनुसंधान व्‍यवस्‍था के निर्माण की प्रतिबद्धता जताई। एसएसी-इसरो के निदेशक डॉ. नीलेश देसाई ने ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के लिए 12-दिवसीय अंतरिक्ष विज्ञान आउटरीच कार्यक्रम की घोषणा की और सुव्यवस्थित अनुसंधान एवं विकास वातावरण की आवश्यकता पर बल दिया।

सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर.ए. माशेलकर ने अपने मुख्य भाषण में अनुसंधान एवं विकास परिदृश्य का आकलन किया, प्रमुख कमियों की पहचान की और प्रगति के लिए कार्रवाई योग्य रणनीतियों का सुझाव दिया। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत ने समापन भाषण में अनुसंधान संस्थानों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी संस्थाओं में बदलने की तात्कालिकता पर जोर देते हुए संस्थागत मानकों, अनुपालन प्रक्रियाओं के सरलीकरण और अकादमिक-उद्योग संबंधों को मज़बूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान क्षेत्र में टकराव को कम करना राष्ट्रीय वैज्ञानिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है।

दो दिवसीय परामर्श बैठक में अनुसंधान एवं विकास प्रणाली को मज़बूत करने, वित्त पोषण एवं नियामक ढांचों में सुधार और ज्ञान संसाधनों तक पहुंच में वृद्धि जैसे प्रमुख विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। चर्चाएं मौजूदा संस्थागत ढांचों की कमियों की पहचान और उन्हें दूर करने की रणनीतियों पर केंद्रित रहीं, जिनमें प्रशासनिक तत्परता और नियामक जवाबदेही पर बल दिया गया। प्रतिभागियों ने सुव्यवस्थित वित्त पोषण तंत्र, मज़बूत अनुसंधान अवसंरचना और सरलीकृत नियामक प्रक्रियाओं की तत्काल आवश्यकता रेखांकित की। बैठक में यह भी दोहराया गया कि नीति आयोग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और नवाचार-संचालित अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

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