संसद का मानसून सत्र 2025: पीएम मोदी ने ‘राष्ट्र गौरव और विजयोत्सव’ का आह्वान किया, अंतरिक्ष, सैन्य व आर्थिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दशक शांति और प्रगति के साथ आगे बढ़ने का दशक है। उन्होंने बताया कि आतंकवाद और नक्सलवाद/माओवाद का दायरा बहुत तेजी से सिकुड़ रहा है।

PM Modi Urges 'National Pride and Triumph' at Parliament's Monsoon Session 2025
PM Modi Urges 'National Pride and Triumph' at Parliament's Monsoon Session 2025

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के मानसून सत्र 2025 के आरंभ के अवसर पर अपने संबोधन में इसे “राष्ट्र गौरव और विजयोत्सव” का सत्र बताया। उन्होंने मानसून को नवीनता और नवसृजन का प्रतीक बताते हुए देश में अब तक हुई अच्छी बारिश और उसके कृषि व अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में जल भंडारण लगभग तीन गुना हो गया है, जिससे भविष्य में अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।

अंतरिक्ष में भारत का परचम और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन

प्रधानमंत्री ने सबसे पहले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर भारत का तिरंगा झंडा फहराने को हर देशवासी के लिए गौरवपूर्ण पल बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के प्रति उमंग व उत्साह भरने वाली है, और संसद इसका एक स्वर से यशगान करेगी, जो भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए प्रेरक होगा।

पीएम मोदी ने इस सत्र को एक “विजयोत्सव” भी करार दिया, जिसमें उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय सेना के पराक्रम का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सेना ने आतंकियों के आकाओं के घर में जाकर 22 मिनट के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया। उन्होंने इस ऑपरेशन में ‘मेड इन इंडिया’ सैन्य शक्ति के नए स्वरूप की सराहना की, जिस पर दुनिया भी आकर्षित हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सदन में इस विजयोत्सव का गौरवगान भारतीय सैन्य शक्ति को बल देगा, रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, और सैन्य क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और विनिर्माण को प्रोत्साहन देगा।

शांति, प्रगति और आर्थिक सशक्तिकरण

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दशक शांति और प्रगति के साथ आगे बढ़ने का दशक है। उन्होंने बताया कि आतंकवाद और नक्सलवाद/माओवाद का दायरा बहुत तेजी से सिकुड़ रहा है। उन्होंने गर्व से कहा कि बम, बंदूक और पिस्तौल के सामने देश का संविधान जीत रहा है, और कल तक जो रेड कॉरिडोर थे, वे अब ग्रीन ग्रोथ जोन में परिवर्तित होते नजर आ रहे हैं।

आर्थिक क्षेत्र की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में जब उनकी सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब देश ‘फ्रेजाइल-5’ की अवस्था से गुजर रहा था और वैश्विक अर्थव्यवस्था में 10वें स्थान पर था। आज भारत तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने 25 करोड़ गरीबों के गरीबी से बाहर निकलने की बात कही, जिसकी विश्व की कई संस्थाएं सराहना कर रही हैं। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले जहां महंगाई दर दोहरे अंकों में हुआ करती थी, वहीं आज यह लगभग 2% पर आकर आम आदमी के जीवन में राहत लाई है।

प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया और यूपीआई की वैश्विक सफलता पर भी जोर दिया, और कहा कि भारत में रियल टाइम डिजिटल लेनदेन दुनिया में सबसे ज्यादा हो रहे हैं। उन्होंने इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) की रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि भारत में 90 करोड़ से अधिक लोग अब सोशल सिक्योरिटी के दायरे में हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा भारत को ‘ट्रेकोमा फ्री’ घोषित किए जाने को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

राष्ट्रीय एकता और दलगत राजनीति से ऊपर देशहित

प्रधानमंत्री ने पहलगाम की “क्रूर हत्या, अत्याचार, नरसंहार” की घटना का स्मरण करते हुए कहा कि उस समय देशहित में ज्यादातर दलों के प्रतिनिधियों ने विश्व भ्रमण किया और पाकिस्तान को बेनकाब करने का एक सफल अभियान चलाया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए सभी सांसदों और दलों की सराहना करते हुए कहा कि इसने देश में एक सकारात्मक वातावरण पैदा किया और विश्व ने भारत की बात को स्वीकार किया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि एकता की ताकत और एक स्वर का सामर्थ्य देश को उत्साह से भर देता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मानसून सत्र में भी यह विजयोत्सव इसी भावना से प्रकट होगा, देश की सैन्य शक्ति और सामर्थ्य की सराहना करेगा, और 140 करोड़ नागरिकों को नई प्रेरणा देगा।

अंत में, पीएम मोदी ने राजनीतिक दलों से आह्वान किया कि भले ही दल हित में मतभेद हों, लेकिन देशहित में मन जरूर मिलने चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सत्र में देश के विकास यात्रा को बल देने वाले अनेक विधेयक प्रस्तावित हैं, और सभी माननीय सांसद उत्तम डिबेट के माध्यम से उन्हें पारित करेंगे।

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