नई दिल्ली: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में 10 साल से अधिक पुरानी डीजल गाड़ियों और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को ईंधन न देने का नियम अब 1 नवंबर 2025 से लागू होगा। पहले यह प्रतिबंध 1 जुलाई से दिल्ली में लागू होने वाला था। केंद्र सरकार के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की आज हुई एक अहम बैठक में यह फैसला लिया गया है कि फिलहाल 31 अक्टूबर तक इन पुराने वाहनों को ईंधन मिल सकेगा।
यह प्रतिबंध अब दिल्ली के साथ-साथ NCR के पांच प्रमुख शहरों – गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर (नोएडा), सोनीपत, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी एक साथ लागू होगा। CAQM के 23 अप्रैल के पुराने आदेश में भी NCR के इन शहरों में यह प्रतिबंध 1 नवंबर से ही लागू किया गया था। दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने 3 जुलाई को CAQM को लिखे अपने पत्र में यह मांग उठाई थी कि पुराने वाहनों को पेट्रोल-डीजल देने पर रोक दिल्ली में NCR के शहरों के साथ ही लगाई जाए, जिसे आज की बैठक में CAQM ने स्वीकार कर लिया है।
आज हुई CAQM बैठक के अनुसार, दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के सचिव ने दलील दी कि राजधानी में पेट्रोल पंपों पर लगे ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर) कैमरे अभी पूरी तरह सक्षम नहीं हैं और उनमें कुछ तकनीकी दिक्कतें हैं। इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने तर्क दिया कि अगर यह नीति केवल दिल्ली तक सीमित रहती, तो पुरानी वाहन मालिक पड़ोसी राज्यों के NCR में आने वाले शहरों में जाकर ईंधन भरवा सकते थे, जिससे प्रदूषण नियंत्रण की मूल भावना ही कमजोर पड़ती और दिल्ली की सड़कों पर पुरानी गाड़ियों को रोकने की मुहिम पूरी नहीं होती।
बैठक में तय हुआ कि दिल्ली सरकार को 31 अक्टूबर तक पेट्रोल पंपों में लगे ANPR कैमरों की तकनीक खामियों को दूर करना होगा। इसके बाद 1 नवंबर 2025 से दिल्ली के साथ-साथ NCR के पांचों जिलों में पुरानी गाड़ियों को डीजल-पेट्रोल न देने का नियम एक साथ लागू होगा। CAQM के अनुसार, पुरानी गाड़ियों को फ्यूल न देने के निर्णय को वापस नहीं लिया गया है, बल्कि उसे बेहतर तरीके से लागू करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है।
दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने CAQM के फैसले पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार को लगता है कि वाहन को सड़क से हटाने का फैसला उसकी उम्र के आधार पर नहीं, बल्कि वाहन कितना प्रदूषण कर रहा है उसके आधार पर होना चाहिए। ऐसे में अब आने वाले दिनों में दिल्ली सरकार इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट और NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) जाएगी और वैज्ञानिक साक्ष्य पेश कर वहां भी राहत मांगेगी।
