उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दी श्रद्धांजलि, शिक्षा और लोकतंत्र पर किया प्रकाश

श्री धनखड़ ने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “शिक्षा समानता लाती है, शिक्षा असमानताओं को कम करती है, शिक्षा लोकतंत्र को जीवन देती है।”

VP Dhankhar Pays Tribute to Dr. Syama Prasad Mookerjee
VP Dhankhar Pays Tribute to Dr. Syama Prasad Mookerjee

उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने मुखर्जी के “एक विधान, एक निशान, एक प्रधान” के गुंजायमान आह्वान को याद करते हुए कहा कि यह देश के इतिहास का एक महान दिन है, जब हमने अपने सबसे बेहतरीन सपूतों में से एक को खोया।

उपराष्ट्रपति ने अनुच्छेद 370 को लेकर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “हम लंबे समय तक अनुच्छेद 370 से परेशान रहे। इसने हमें और जम्मू-कश्मीर को नुकसान पहुंचाया। अनुच्छेद 370 और सख्त कानून के अनुच्छेद 35ए ने लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों और मौलिक अधिकारों से वंचित रखा।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को इस अनुच्छेद को निरस्त करने के लिए दूरदर्शी बताते हुए कहा कि 5 अगस्त 2019 को इसे निरस्त किया गया और 11 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट में इसकी कानूनी चुनौती भी विफल हो गई।

विश्वविद्यालयों में नवाचार और असहमति का महत्व:

उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) द्वारा आयोजित कुलपतियों के 99वें वार्षिक सम्मेलन और राष्ट्रीय सम्मेलन (2024-2025) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, श्री धनखड़ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह नीति भारत को केवल कौशल-निर्माण में नहीं, बल्कि आत्म-जागृति में विश्वास दिलाती है, और यह हमारी सभ्यतागत भावना व लोकाचार के साथ प्रतिध्वनित होती है।

उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालयों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, “हमारे विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने के लिए नहीं हैं; वहां नवाचार के कठिन परीक्षा और विचारों के स्थान होने चाहिए।” उन्होंने कुलपतियों और शिक्षाविदों से अपील की कि विश्वविद्यालयों को असहमति, वाद-विवाद, संवाद और चर्चा के लिए जगह देनी चाहिए, क्योंकि अभिव्यक्ति और वाद-विवाद हमारे लोकतंत्र के अभिन्न अंग हैं।

शिक्षा, समानता और राष्ट्रीय प्रगति:

श्री धनखड़ ने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “शिक्षा समानता लाती है, शिक्षा असमानताओं को कम करती है, शिक्षा लोकतंत्र को जीवन देती है।” उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की आईटी को ‘उद्योग का दर्जा’ देने और स्कूली शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए प्रशंसा की।

देश की राष्ट्रीय प्रगति की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत अवसरों, उद्यमिता, स्टार्टअप और नवाचार के रूप में उभरा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु तकनीक, क्वांटम विज्ञान और डिजिटल इथिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में समझौता रहित उत्कृष्टता के संस्थान स्थापित करें, तभी देश नेतृत्व करेगा और अन्य देश उसका अनुसरण करेंगे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा सिर्फ जनहित के लिए नहीं है, बल्कि यह हमारी सबसे रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति है और राष्ट्रीय सुरक्षा का भी आश्वासन देती है। उन्होंने शिक्षाविदों से “असंभव विकल्प” चुनने और आसान रास्ता न अपनाने का आह्वान किया, क्योंकि ये विकल्प ही हमारे चरित्र और ताकत को परिभाषित करते हैं।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री श्री सुनील कुमार शर्मा, एमिटी एजुकेशन एंड रिसर्च ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार चौहान, एआईयू के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक, एआईयू की महासचिव डॉ. (श्रीमती) पंकज मित्तल और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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