नई दिल्ली/गाजियाबाद: उत्तर भारत में लगातार बढ़ रहा तापमान न केवल जनजीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है। भीषण गर्मी की वजह से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष रूप से अधिक खतरा है। डॉक्टरों ने इस स्थिति को हल्के में न लेने और आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की है।
र्मी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं:
- अत्यधिक गर्मी से ‘लू’ लगने का खतरा बढ़ जाता है, जिसके लक्षणों में तेज सिर दर्द, चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी और उल्टी शामिल हैं। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।
- शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से थकान, मांसपेशियों में ऐंठन और यहां तक कि बेहोशी भी आ सकती है।
- गर्मी से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे हृदय रोगियों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।
- अत्यधिक गर्मी चिड़चिड़ापन, तनाव और नींद की समस्याओं को बढ़ा सकती है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
कैसे करें बचाव? — विशेषज्ञों की सलाह:
- शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, नींबू पानी या ताजे फलों का जूस पिएं। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ओआरएस (ORS) का सेवन भी फायदेमंद है।
- हल्के रंग के, सूती और ढीले कपड़े पहनें ताकि शरीर को ठंडा रखा जा सके और हवा का संचार बना रहे।
- दिन के सबसे गर्म समय (दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक) में घर से बाहर निकलने से बचें। यदि आवश्यक हो, तो छाता, टोपी या कपड़े से सिर ढक कर निकलें और छायादार स्थानों पर रुक-रुक कर आराम करें।
- बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि वे गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। उन्हें नियमित रूप से तरल पदार्थ दें और सुनिश्चित करें कि वे ठंडी जगह पर रहें।
डॉक्टरों की सलाह है कि, “हीटवेव को हल्के में न लें। लक्षण दिखते ही छांव में जाएं, पानी पिएं और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।”
