यूरिया की कीमतों में 10% की गिरावट, रबी सीजन से पहले किसानों को राहत; जानें क्या होगा असर

रबी सीजन की बुवाई से ठीक पहले भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में लगभग 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते भारत को अगस्त के मुकाबले काफी कम लागत पर यूरिया मिल रहा है।

रबी सीजन से पहले 10% सस्ता हुआ यूरिया (Image: Pexels)
रबी सीजन से पहले 10% सस्ता हुआ यूरिया (Image: Pexels)

रबी सीजन की बुवाई से पहले किसानों और सरकार के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में गिरावट आई है। इसके चलते भारत को अगस्त के मुकाबले करीब 10 फीसदी कम कीमत पर यूरिया मिल रहा है। इससे देश में खाद की उपलब्धता बनाए रखने के साथ-साथ सरकार के उर्वरक सब्सिडी खर्च को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

दरअसल, वैश्विक बाजार में यूरिया की आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम हुआ है। इसका फायदा भारत को खाद के आयात में मिल रहा है। रबी सीजन के दौरान गेहूं, सरसों और दूसरी सर्दियों की फसलों की बुवाई के लिए यूरिया की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में कम कीमत पर खाद की खरीद सरकार के लिए काफी अहम है।

सरकारी कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) ने रबी सीजन से पहले 17 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए टेंडर जारी किया है। इसके तहत पश्चिमी तट के लिए 10 लाख टन और पूर्वी तट के लिए 7 लाख टन यूरिया खरीदा जाना है। इस टेंडर में पूर्वी तट के लिए सबसे कम बोली 352.10 डॉलर प्रति टन और पश्चिमी तट के लिए 356.25 डॉलर प्रति टन रही।

इसकी तुलना अगस्त में जारी टेंडर से करें तो उस समय शुरुआती कीमतें करीब 390 से 394 डॉलर प्रति टन थीं। यानी नई बोलियों में यूरिया की कीमतों में लगभग 10 फीसदी की गिरावट आई है। इससे भारत को पहले के मुकाबले कम लागत पर खाद खरीदने का अवसर मिल रहा है।

यूरिया खरीदने के लिए जारी इस टेंडर में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भी अच्छी दिलचस्पी दिखाई है। IPL ने जहां 17 लाख टन यूरिया खरीदने के लिए टेंडर निकाला था, वहीं कंपनियों की ओर से करीब 53.5 लाख टन यूरिया की पेशकश की गई। यानी भारत की जरूरत से तीन गुना से भी ज्यादा यूरिया की पेशकश हुई है।

इससे संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया निर्यात करने वाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। ऐसे में भारत को खरीद के दौरान बेहतर कीमतें मिलने की संभावना है। हालांकि, अंतिम लागत इस बात पर निर्भर करेगी कि खरीद किस कीमत पर तय होती है और यूरिया की आपूर्ति कब तक होती है।

अब सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया सस्ता होने से किसानों को भी खाद कम कीमत पर मिलेगी? इसका जवाब थोड़ा अलग है। भारत में यूरिया की खुदरा कीमत सरकार नियंत्रित करती है। फिलहाल किसानों को 45 किलोग्राम यूरिया का बैग 242 रुपये में मिलता है। यूरिया की वास्तविक लागत और किसानों से मिलने वाली रकम के बीच का अंतर सरकार सब्सिडी के रूप में चुकाती है।

इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने का सीधा फायदा किसानों को खुदरा कीमत में कटौती के रूप में मिले, यह जरूरी नहीं है। इसका लाभ मुख्य रूप से सरकार के उर्वरक सब्सिडी खर्च में राहत के तौर पर मिल सकता है। हालांकि, किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि बुवाई के समय उन्हें अपने नजदीकी खाद केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध हो।

गौरतलब है कि इस साल अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजार में यूरिया की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। खाड़ी क्षेत्र में संकट और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के कारण अप्रैल में यूरिया की कीमतें 959 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई थीं। इसके बाद वैश्विक आपूर्ति में सुधार और चीन की निर्यात नीति में ढील से बाजार में यूरिया की उपलब्धता बढ़ने लगी। इसका असर कीमतों पर पड़ा और अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी देखने को मिल रही है।

कुल मिलाकर, रबी सीजन से पहले यूरिया की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट भारत के लिए राहत की खबर है। इससे सरकार को खाद आयात की लागत कम करने और सब्सिडी के खर्च पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसानों को वास्तविक राहत तभी महसूस होगी, जब गेहूं, सरसों और दूसरी रबी फसलों की बुवाई के दौरान यूरिया समय पर और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में खाद की कीमतों के साथ-साथ उसकी आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर भी नजर रहेगी।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 Breaking News Wale - Latest Hindi News by Breaking News Wale