कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपनी पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल भेजे जाने की कार्रवाई पर कड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर नाराजगी जाहिर करते हुए तीखे शब्दों में पूछा है कि आखिर दोनों की गलती क्या थी और क्या जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने की कोशिश करना कोई गुनाह है? पुलिस कार्रवाई के तहत सौरव दास और आशुतोष रांका को बेल बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और रिपीट ऑफेंडर पाए जाने पर पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है, जबकि तीसरे साथी अजिंक्य शिंदे को 5 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरवाकर रिहा कर दिया गया है।
‘इंडिया’ ब्लॉक और सीजेपी का मकसद एक ही
अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक पूरी तरह से स्वतंत्र संस्था है और आगे भी स्वतंत्र बनी रहेगी, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि पार्टी ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक के खिलाफ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीजेपी और ‘इंडिया’ ब्लॉक दोनों के आंदोलन का मूल उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आवाज उठाना और एक ही मकसद के लिए संघर्ष करना है।
बेल बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप
दिल्ली पुलिस के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका ने भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का दोबारा उल्लंघन किया है। पुलिस ने उन्हें ‘रिपीट ऑफेंडर’ करार देते हुए उनके पिछले आचरण का हवाला दिया और अदालत को बताया कि इन्होंने पूर्व में दिए गए बेल बॉन्ड की शर्तों को तोड़ा है। इसके बाद सक्षम न्यायालय (SEM कोर्ट) ने दोनों नेताओं को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। वहीं, अजिंक्य शिंदे को एक साल तक क्षेत्र में शांति बनाए रखने और अशांति न फैलाने की शर्त पर रिहा किया गया है।
जंतर-मंतर पर हुआ था हंगामा
उल्लेखनीय है कि हाल ही में दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। इसके बावजूद मंगलवार सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे भारी बैरिकेडिंग को पार करके जंतर-मंतर परिसर में दाखिल हो गए थे। वहां उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की थी, जिसके बाद सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने फौरन कार्रवाई करते हुए तीनों को हिरासत में ले लिया था। इससे पहले शनिवार को भी इन नेताओं को दिल्ली पहुंचते ही एयरपोर्ट पर एहतियातन हिरासत में लिया गया था और एक साल तक शांति भंग न करने के मुचलके पर रिहा किया गया था, लेकिन शर्तों के कथित उल्लंघन के बाद अब उन पर यह कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है।
