वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन ने 8 अक्टूबर 2026 को आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी और आईटी कंपनियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन यानी ‘PERM’ कार्यक्रम को अस्थायी रूप से निलंबित करने की घोषणा की है। इस कार्रवाई के दायरे में भारत की दिग्गज आईटी कंपनियां टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, विप्रो, एचसीएलटेक और कॉग्निजेंट शामिल हैं। इसके अलावा फ्रांसीसी कंपनी कैपजेमिनी तथा अमेरिकी दिग्गज टेक कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट और एडोब भी इस सूची में शामिल हैं।
अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, इन कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग और स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के आरोप लगे हैं, जिनकी जांच फिलहाल जारी है। इस फैसले के बाद लंबे समय से अमेरिका में काम कर रहे और ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हजारों भारतीय कर्मचारियों में अनिश्चितता बढ़ गई है। हालांकि, विशेषज्ञों और भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि PERM प्रक्रिया पर रोक का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कर्मचारियों का H-1B वीजा रद्द हो गया है या उन्हें तुरंत अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। PERM और H-1B दो अलग-अलग इमिग्रेशन प्रक्रियाएं हैं, इसलिए मौजूदा वीजाधारकों की वैध स्थिति पर इसका सीधा असर नहीं पड़ता।
PERM प्रक्रिया रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पाने का पहला और बेहद महत्वपूर्ण चरण होती है, जिसमें नियोक्ता को अमेरिकी श्रम विभाग के समक्ष यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं था। PERM की मंजूरी मिलने के बाद ही नियोक्ता यूएससीआईएस (USCIS) के पास I-140 याचिका दाखिल कर पाता है। PERM पर रोक लगने से उन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित होगी, जिनके आवेदन अभी लंबित हैं या जिनकी कंपनियों ने अभी तक प्रक्रिया शुरू नहीं की थी।
प्रभावित कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों को घबराने के बजाय अपनी स्थिति की स्पष्ट समीक्षा करने की सलाह दी गई है। सबसे पहले अपने एचआर या इमिग्रेशन वकील से संपर्क करके अपने PERM और I-140 का सटीक स्टेटस जानना जरूरी है। जिन कर्मचारियों का I-140 पहले ही स्वीकृत हो चुका है, वे H-1B वीजा के 6 साल की सामान्य सीमा के बाद भी विस्तार पाने के पात्र हो सकते हैं। इसके अलावा, नई नौकरी स्वीकार करने से पहले नई कंपनी द्वारा H-1B ट्रांसफर और ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप की शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
कर्मचारियों को अपने जीवनसाथी (H-4 वीजा व EAD) और बच्चों के इमिग्रेशन दस्तावेजों की समयसीमा भी जांच लेनी चाहिए। इसके साथ ही, असाधारण योग्यता वाले पेशेवरों के लिए ओ-1 (O-1) वीजा, ईबी-1 (EB-1) श्रेणी या नेशनल इंटरेस्ट वेवर (NIW) जैसे वैकल्पिक इमिग्रेशन रास्तों पर भी कानूनी सलाह ली जा सकती है। आर्थिक मोर्चे पर, आपातकालीन फंड तैयार रखना और सोशल मीडिया की अफवाहों से बचकर केवल अमेरिकी श्रम विभाग, USCIS व अपनी कंपनी के आधिकारिक अपडेट्स पर भरोसा करना ही सबसे बेहतर रणनीति होगी।
