सऊदी अरब पर हमला हुआ तो पाकिस्तान देगा सैन्य मदद, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बड़ा बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा है कि सऊदी अरब पर हमला होने की स्थिति में उसकी रक्षा के लिए पाकिस्तान अपने उपलब्ध सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल कर सकता है। यह बयान अगस्त 2026 में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के संदर्भ में आया है।

पाकिस्तान रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ
पाकिस्तान रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ

पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा है कि अगर सऊदी अरब पर हमला होता है तो उसकी रक्षा के लिए पाकिस्तान अपने सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच हुए नए रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान की सैन्य क्षमताएं सऊदी अरब की मदद के लिए उपलब्ध रहेंगी।

ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने मंगलवार को रोम यात्रा के दौरान यह बयान दिया। उनसे सवाल किया गया था कि क्या पाकिस्तान की सेना यमन में ईरान से जुड़े ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों में शामिल रही है। आसिफ ने इस सवाल पर न तो ऐसी किसी कार्रवाई की पुष्टि की और न ही इससे इनकार किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की रक्षा के लिए हुए समझौते के तहत पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमताएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान से किसी सैन्य सहायता की मांग की है या नहीं।

यह बयान पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए नए रक्षा समझौते के संदर्भ में आया है। तीनों देशों ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के मुताबिक किसी एक सदस्य देश पर होने वाला हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। तीनों देशों की ओर से यह भी कहा गया है कि समझौता रक्षात्मक प्रकृति का है और किसी विशेष देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है।

आसिफ ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर हूती विद्रोहियों से पैदा हुई चिंताओं का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल में हूतियों ने यमन के लाल सागर तट पर स्थित मोखा बंदरगाह शहर और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा किया है। इससे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास उनकी मौजूदगी बढ़ने की बात कही गई है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि हूती विद्रोहियों और इराक में उनके सहयोगी मिलिशिया समूहों ने सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बनाया है। उनके अनुसार, सऊदी टैंकरों को इस समुद्री रास्ते से गुजरने से रोकने की कोशिश भी की गई है। आसिफ ने हूतियों को हमलावर बताते हुए कहा, “सऊदी अरब का कोई भी दुश्मन पाकिस्तान का दुश्मन है।”

नए रक्षा समझौते को जमीन पर लागू करने के लिए फिलहाल उसका ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसके लिए एक सचिवालय बनाया जा रहा है, जो गठबंधन की संरचना और उसके काम करने के तरीके को तय करेगा। कुछ अन्य देशों ने भी इस व्यवस्था में शामिल होने में रुचि दिखाई है, लेकिन फिलहाल गठबंधन का विस्तार करने की कोई योजना नहीं बताई गई है।

आसिफ का यह बयान तीनों देशों के सेना प्रमुखों की रियाद में हुई बैठक के कुछ दिन बाद आया है। इस बैठक में हूती हमलों से निपटने के संभावित तरीकों पर चर्चा हुई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के शीर्ष राजनयिकों के बीच रक्षा समझौते को लागू करने और सऊदी अरब पर हुए हमलों को लेकर बातचीत हुई थी।

हालांकि, सऊदी अरब को सैन्य सहयोग देने की बात के साथ पाकिस्तान ईरान के साथ बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहता है। पाकिस्तान क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत फिर शुरू करने के पक्ष में है। अप्रैल में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता की मेजबानी की थी। जून में दोनों पक्षों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की कोशिश करने पर सहमति जताई थी, लेकिन दोबारा संघर्ष शुरू होने के बाद यह समयसीमा पूरी हो गई।

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