उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से हो रही भारी बारिश और आंधी-तूफान के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रतिकूल मौसम और अतिवृष्टि से प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने रविवार को प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने सभी अधिकारियों को प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी समस्याएं सुनने और उन्हें तुरंत आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।
सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई बारिश
राहत आयुक्त द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 25 सितंबर से 27 सितंबर की सुबह तक प्रदेश में औसतन 66.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा महज 7.6 मिलीमीटर रहता है। इस प्रकार राज्य में सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। प्रदेश के कुल 75 जिलों में से 56 जिलों में अत्यधिक बारिश हुई है। फर्रूखाबाद में सामान्य से 7385 प्रतिशत, कन्नौज में 5664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4240 प्रतिशत तथा महोबा में 4100 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।
अतिवृष्टि से भारी जन-धन की हानि
पिछले 60 घंटों के दौरान आंधी-तूफान और अतिवृष्टि के कारण प्रदेश भर में भारी तबाही हुई है। प्राकृतिक आपदा के कारण अब तक 56 लोगों की जान जा चुकी है, 46 लोग घायल हुए हैं, 107 पशुओं की हानि हुई है और कुल 1,021 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
जिलों में जनहानि और मकानों के नुकसान की स्थिति
जनहानि के मामलों में सबसे ज्यादा प्रभावित सीतापुर जिला रहा है, जहाँ सात लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच लोगों की जान गई है, जबकि अयोध्या और गोरखपुर में चार-चार लोगों की मृत्यु की सूचना मिली है।
मकानों के क्षतिग्रस्त होने के मामलों में हरदोई जिला सबसे ऊपर है, जहाँ 272 मकानों को नुकसान पहुँचा है। वहीं सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 और बहराइच में 44 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मुस्तैद हैं और राहत सामग्री पहुँचाने का काम कर रही हैं।
