SIR विवाद पर विपक्ष का EC पर हमला, राहुल गांधी-अखिलेश यादव से सिब्बल-सिंघवी तक ने क्या कहा?

SIR Controversy: मतदाता सूची के Special Intensive Revision को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट के बाद आयोग की ओर से सफाई सामने आई है। आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त किसी मुद्दे पर सवाल, स्पष्टीकरण या टिप्पणी दर्ज कर सकते हैं, लेकिन हर टिप्पणी को औपचारिक “डिसेंट” नहीं माना जाता।

SIR Voter List Controversy: राहुल-अखिलेश समेत इन नेताओं ने घेरा EC
SIR Voter List Controversy: राहुल-अखिलेश समेत इन नेताओं ने घेरा EC

मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब आयोग के सूत्रों ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, किसी मुद्दे पर विचार के दौरान चुनाव आयुक्त सवाल उठा सकते हैं, स्पष्टीकरण मांग सकते हैं या अपनी राय दर्ज करा सकते हैं। हालांकि, ऐसी टिप्पणियों को औपचारिक असहमति यानी डिसेंट नहीं माना जाता। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े विषयों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपनी टिप्पणियां की थीं और अंतिम फैसला लेने से पहले उन पर विचार किया गया। संबंधित आदेशों पर तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर होने की बात भी आयोग के सूत्रों ने कही है।

यह सफाई द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं और इनका संबंध मतदाता सूची तथा उसके प्रबंधन से जुड़े फैसलों से था।

रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर ‘वोट चोरी’ को भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर हमला बताया। उन्होंने बीजेपी, आरएसएस और चुनाव आयोग पर मिलकर वोट चोरी करने का आरोप लगाया और इसे राजद्रोह बताया। राहुल गांधी ने कहा कि इस मामले में न्याय होगा।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। उनके मुताबिक, इन आपत्तियों में फॉर्म-6 के कथित दुरुपयोग, सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल, मतदाता सूची और फैसलों में पारदर्शिता जैसे मुद्दे शामिल थे। खड़गे ने SIR के पहले तीन चरणों में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13.8 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगते हुए कहा कि उनके अनुसार यह मुद्दा लोकतंत्र और संस्थाओं की स्वतंत्रता से भी जुड़ा है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस रिपोर्ट को गंभीर मामला बताया। उन्होंने कहा कि अगर पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति दर्ज कराई है, तो इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। अखिलेश ने कहा कि किसी स्वतंत्र संस्था के सदस्यों को निष्पक्ष तरीके से काम करने की स्वतंत्रता नहीं मिलना या उनकी बात नहीं सुना जाना लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर स्वत: संज्ञान लेने की मांग की।

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग से दोनों चुनाव आयुक्तों की सभी आपत्तियां और डिसेंट नोट सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और मतदाता डेटा तथा आयोग के आईटी सिस्टम से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि फॉर्म-6 में बदलाव आयोग के स्तर पर किया गया, जबकि इसके लिए नियमों में बदलाव की जरूरत थी। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म-6 में SIR से संबंधित एक नया घोषणा संबंधी हिस्सा जोड़ा गया था और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मई में इस पर कानूनी आपत्ति दर्ज की थी।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में आयोग के कई आदेश और सर्कुलर औपचारिक मंजूरी के बिना जारी किए गए। केजरीवाल ने SIR की पूरी प्रक्रिया रद्द करने की मांग की। उन्होंने 13 करोड़ से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का भी दावा किया। हालांकि, ये दावे विपक्षी नेताओं की ओर से किए गए आरोप हैं।

केजरीवाल ने विवाद के बीच SIR के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया रद्द करने, पिछले वर्षों में हुए चुनावों को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी रखी। उन्होंने गिरफ्तारी और राष्ट्रद्रोह के मुकदमे की मांग भी की।

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी SIR पर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यों का निकाय है और फैसले बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं। सिब्बल ने फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और SIR के दायरे से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने, SIR रोकने और पूरे मामले की जांच की मांग की। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की अपील की।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव आयोग में कथित पक्षपात और अन्याय का मुद्दा उठाते रहे हैं और अब दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से भी मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने चिंताएं रखे जाने की बात सामने आई है। प्रियंका ने इसे लोकतंत्र से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया और निष्पक्ष जांच तथा जवाबदेही की मांग की।

इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयुक्तों की टिप्पणियों को औपचारिक डिसेंट नहीं कहा जा सकता और फैसले तीनों सदस्यों के विचार के बाद लिए गए। दूसरी ओर, द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई लिखित आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। इसी अंतर को लेकर अब SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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