सावन मास की धार्मिक परंपराओं में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। सावन के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता में इस व्रत को संतान सुख और परिवार की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। खासतौर पर संतान की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण माना गया है।
पुत्रदा एकादशी 2026 में कब है?
इस साल पुत्रदा एकादशी की तारीख को लेकर पंचांग के अनुसार स्थिति स्पष्ट है। एकादशी तिथि की शुरुआत 23 अगस्त की सुबह 2 बजे होगी और यह तिथि 24 अगस्त की सुबह 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि को आधार मानने पर व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। 24 अगस्त को भी एकादशी तिथि का प्रभाव सुबह तक रहेगा।
पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का शुभ समय
भगवान विष्णु की आराधना के लिए 23 अगस्त को सुबह 7 बजकर 32 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक का समय बताया गया है। इसके अगले दिन 24 अगस्त को सुबह 5 बजकर 55 मिनट से 7 बजकर 32 मिनट तक पूजा की जा सकती है। इसके बाद सुबह 9 बजकर 9 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक भी भगवान विष्णु की पूजा का समय रहेगा।
कैसे करें पुत्रदा एकादशी की पूजा?
पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा की शुरुआत स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के साथ की जाती है। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा में दीप, धूप, फूल, चंदन और नैवेद्य अर्पित करने के बाद भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। इसके साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का भी विधान बताया गया है।
इस दिन विष्णु सहस्रनाम और शिव स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है। श्रद्धालु एकादशी व्रत की कथा सुनते या पढ़ते हैं और पूरे दिन व्रत रखते हैं। रात के समय भगवान के भजन-कीर्तन करने की परंपरा है। व्रत की प्रक्रिया अगले दिन द्वादशी तिथि पर पूरी होती है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान-दक्षिणा देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए फलदायी माना गया है। इसके अलावा इसे परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने और पापों से मुक्ति दिलाने वाला व्रत भी माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु और भगवान शिव की कृपा से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता आती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
